Jamia Millia Islamia News: देश की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा गतिरोध अब एक गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ पर पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन की कड़ी शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने कई जाने-माने राजनेताओं और कांग्रेस सांसदों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। प्रशासन का आरोप है कि इन नेताओं ने छात्रों को भड़काने और जबरन परिसर में घुसने की कोशिश की थी।
किन नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई?
यूनिवर्सिटी प्रशासन की औपचारिक शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने लोकसभा सांसद इमरान मसूद, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य नेताओं पर मामला दर्ज किया है। इस पूरे विवाद की सुलगती चिंगारी तब भड़की जब बीते शुक्रवार (23 अक्टूबर) को इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी जामिया यूनिवर्सिटी के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में पहुंचे थे। स्थिति के बिगड़ने की आशंका के बीच पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों सांसदों को हिरासत में ले लिया था।
SFI के तीखे आरोप और वायरल वीडियो
उधर, वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि गेट नंबर सात के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों छात्रों को पुलिस ने जबरन हिरासत में लिया। इस घटना से जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस द्वारा छात्रों को डिटेन किए जाने के दृश्य साफ नजर आ रहे हैं।
2006 से ठप हैं छात्र संघ चुनाव
जामिया में जारी इस घमासान की जड़ें करीब दो दशक पुरानी हैं। यूनिवर्सिटी में आखिरी बार साल 2006 में छात्र संघ के चुनाव हुए थे, जिसके बाद से यहां चुनाव पूरी तरह बंद हैं। वर्तमान हालात यह हैं कि पिछले दो हफ्तों से छात्र लगातार धरने पर डटे हुए हैं। विरोध की आंच इतनी तेज है कि चार छात्र पिछले 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। बिगड़ते हालात और सुरक्षा के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी कक्षाएं ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दी हैं और यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट व लाइब्रेरी को अगले आदेश तक के लिए सील/बंद कर दिया गया है।
प्रशासन और छात्रों का आमने-सामने का रुख
यूनिवर्सिटी प्रबंधन का अपना पक्ष है। अधिकारियों के मुताबिक, वाइस चांसलर मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी के नेतृत्व में करीब डेढ़ हजार शिक्षक और नॉन-टीचिंग स्टाफ गेट नंबर सात पर पहुंचे थे। उन्होंने छात्रों से लगभग दो घंटे तक संवाद किया और आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया। दूसरी ओर, छात्रों ने प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके टेंट जबरन उखाड़े गए और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। हाल ही में छात्र संघ चुनाव के नए संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक 7 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, लेकिन SFI की मुख्य मांग है कि इस ड्राफ्टिंग कमेटी में छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।







