Jamia Millia Islamia University: छात्रसंघ चुनाव की मांग के बीच पोस्टर विवाद, दीवारों पर लिखे विवादित नारे, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद हिरासत में
Jamia Millia Islamia University: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच दीवारों पर विवादित नारे लिखे मिलने से तनाव बढ़ गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नारों को हटवाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। 23 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। छात्र 2026-27 सत्र के लिए छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने और प्रदर्शन के दौरान की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
Jamia Millia Islamia University: दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर एक बार फिर गर्माए माहौल और विवादों के केंद्र में है। छात्रसंघ चुनावों की बहाली को लेकर लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच, परिसर की दीवारों पर लिखे गए कुछ संवेदनशील और
विवादित नारों ने मामले को और तूल दे दिया है। विश्वविद्यालय की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर', 'फ्री शरजील इमाम' और 'वीसी गो बैक' जैसे नारे सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आंदोलनरत छात्रों का समर्थन करने पहुँचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। फिलहाल परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बेहद सख्त कर दी गई है।
दीवारों पर दिखे विवादित नारे, CCTV तारों से छेड़छाड़
सामने आई तस्वीरों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर की विभिन्न दीवारों पर रात के अंधेरे में नारे उकेरे गए थे। इन नारों में कश्मीर और शरजील इमाम के समर्थन के अलावा दक्षिणपंथी संगठनों RSS और ABVP के खिलाफ भी बातें लिखी गई थीं। मामले की नजाकत को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन नारों को तुरंत पुतवा कर हटवा दिया है। प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि जिन जगहों पर ये नारे लिखे मिले, वहाँ मौजूद CCTV कैमरों की
वायरिंग के साथ छेड़छाड़ पाई गई है ताकि शरारती तत्वों की पहचान न हो सके। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस हरकत के पीछे कौन लोग शामिल थे, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की अंदरूनी जांच की जा रही है।
छात्र आंदोलन को बदनाम करने की साजिश' — इमरान मसूद
23 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करने जामिया परिसर पहुँचे थे। विवादित नारों के सामने आने पर उन्होंने कड़े शब्दों में इसकी निंदा की और खुद को व छात्रों को इन नारों से पूरी तरह अलग बताया। मसूद ने आशंका जताई कि छात्रों की जायज मांगों और आंदोलन को कमजोर व बदनाम करने के मकसद से बाहरी या असामाजिक तत्वों द्वारा यह साजिश रची गई है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा, "कश्मीर भारत का अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा।" सांसद ने मांग की कि परिसर में माहौल खराब करने वाले और विवादित पोस्टर लगाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने सवाल भी उठाया कि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं, तो प्रशासन और सरकार उनकी मांगों को सुनने के बजाय नजरअंदाज क्यों कर रही है?
कैंपस बना छावनी, दिल्ली पुलिस ने इमरान मसूद को लिया हिरासत में
विवाद गहराते ही दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय के बाहर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनातगी कर दी। आने-जाने वाले सभी वाहनों और संदिग्धों की गहन जांच की जा रही है। कैंपस में माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। छात्रों से बातचीत और मीडिया से मुखातिब होने के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को हिरासत में ले लिया और अपने साथ ले गई।आखिर क्यों सड़कों पर हैं जामिया के छात्र?
गौरतलब है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संगठन और विद्यार्थी बीते 12 अक्टूबर से लगातार धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे हैं।
मुख्य मांग: छात्रसंघ (Students' Union) चुनावों की तत्काल बहाली।
पृष्ठभूमि: जामिया में वर्ष 2006 में छात्रसंघ को भंग कर दिया गया था, जिसके बाद से यहाँ चुनाव नहीं कराए गए हैं।
वर्तमान स्थिति: प्रदर्शनकारी छात्र आगामी 2026-27 सत्र के लिए चुनाव की तारीखों के आधिकारिक ऐलान और हालिया प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को रद्द करने पर अड़े हुए हैं।