Cyber Fraud: WhatsApp पर कंपनी डायरेक्टर की फर्जी प्रोफाइल बनाकर 80 लाख की ठगी, ऐसे दिया झांसा
Cyber Fraud: रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने कंपनी डायरेक्टर के नाम और फोटो से फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाकर अकाउंटेंट से 80 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। दूसरे ट्रांजैक्शन में भेजे गए 13 लाख रुपये बैंक की मदद से वापस मिल गए। पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
Cyber Fraud: रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शातिर ठगों ने सोशल मीडिया ऐप व्हाट्सएप पर एक नामी कंपनी के डायरेक्टर की फेक आईडी (नाम और असली प्रोफाइल फोटो) तैयार की और उनके ही अकाउंटेंट को झांसे में लेकर
80 लाख रुपए की भारी-भरकम रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर करवा ली। इस शातिर वारदात के बाद से स्थानीय कारोबारियों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कैसे दिया गया वारदात को अंजाम?
कमल विहार निवासी विजय राठी 'राठी बंधु कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड' (Rathi Bandhus Commercial Pvt. Ltd.) के डायरेक्टर हैं। कंपनी का मुख्य कार्यालय देवपुरी में राठीस बिल्ड मार्ट के पास स्थित है। घटना 19 अक्टूबर 2026 की दोपहर करीब 1:23 बजे की है। कंपनी के अकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। मैसेज भेजने वाले की डिस्प्ले पिक्चर (DP) और नाम बिल्कुल विजय राठी का ही था, जिसके कारण अकाउंटेंट को एक पल के लिए भी संदेह नहीं हुआ कि यह कोई फर्जी अकाउंट हो सकता है।
- पहला बड़ा झटका (80 लाख का ट्रांसफर): चैट के दौरान शातिर ने कंपनी के बैंक खाते की जानकारी ली और तुरंत भुगतान करने के सख्त निर्देश दिए। मैसेज में बैंक ऑफ इंडिया के 'M I CLOTHING' नाम के खाते का विवरण भेजा गया था। निर्देशक का आदेश मानकर अकाउंटेंट ने कंपनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते से RTGS के जरिए तुरंत 80 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
दूसरा प्रयास और राहत: इसके दो दिन बाद यानी 21 अक्टूबर को ठगों ने 13 लाख रुपए के भुगतान के लिए एक और मैसेज भेजा। इस बार The Federal Bank के 'S S GOLD' नाम के खाते का विवरण दिया गया था। कंपनी ने इस पर भी रकम ट्रांसफर कर दी। हालांकि, इस बार सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते बैंक से संपर्क कर लिया गया, जिससे तकनीकी कार्रवाई के बाद 13 लाख रुपए का यह ट्रांजैक्शन रिवर्स हो गया और रकम सुरक्षित कंपनी के खाते में वापस आ गई।
हालांकि, पहले ट्रांसफर किए गए 80 लाख रुपए तब तक ठगों के हाथ लग चुके थे।
पुलिस ने दर्ज की FIR, तलाश जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने तुरंत टिकरापारा थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिक जांच के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और साइबर सेल की मदद से मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर यह फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट किस आईपी एड्रेस या नंबर से ऑपरेट किया जा रहा था, रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई है और इस पूरे रैकेट के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।