CJP News: बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में पुलिस हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत का मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। जमानती प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद, स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) को मिली कथित धमकी के बाद दोनों नेताओं की रिहाई पर पेंच फंस गया है। फिलहाल दोनों नेता तिहाड़ जेल में ही रहेंगे।
दोपहर तक पूरी हुई प्रक्रिया, शाम को बदला रुख
सीजेपी की लीगल हेड और मामले की पैरवी कर रहीं एडवोकेट रत्ना सिंह ने बताया कि वह सुबह से ही कोर्ट परिसर में मौजूद थीं। मामले की सुनवाई का समय दोपहर 12 बजे तय किया गया था। रत्ना सिंह के अनुसार, दोपहर 12 बजे तक जमानतियों के सत्यापन और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की मंजूरी समेत सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं। लेकिन शाम 5 बजे जब सुनवाई शुरू हुई, तो सरकारी वकील ने SEM को धमकी भरे मैसेज मिलने का मुद्दा उठा दिया और मामला टाल दिया गया।
धमकी मामले में FIR दर्ज, CJP ने आरोपों को नकारा
दिल्ली पुलिस ने किसी अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ SEM को धमकी देने के आरोप में एक नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज की है। इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिहाई की प्रक्रिया रोक दी गई। दूसरी ओर, सीजेपी ने इस धमकी से अपना कोई भी संबंध होने से साफ इंकार किया है। वकील रत्ना सिंह का कहना है, यदि किसी ने SEM को धमकी दी है, तो पुलिस को उस व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी तीसरे अनजान व्यक्ति की हरकत का खमियाजा सौरभ और आशुतोष को क्यों भुगतना पड़े? इसके आधार पर रिहाई रोकना सरासर गलत है।
'गैर-कानूनी तरीके से बढ़ाया जा रहा जेल प्रवास': अभिजीत दीपके
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार और प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सौरभ दास और आशुतोष रांका को जेल के भीतर रखने का अब कोई ठोस या वैध कानूनी आधार नहीं बचा है। सरकार जानबूझकर इस पूरी प्रक्रिया को लंबा खींच रही है। फिलहाल, जब तक धमकी से जुड़े इस नए पेच का कानूनी समाधान नहीं निकलता और जमानती आदेश जारी नहीं होते, तब तक दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल में ही रहना पड़ेगा।







