CJP Leaders: सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ी
CJP Leaders: दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत ने CJP नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी है। दोनों 21 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में रहेंगे। दिल्ली पुलिस ने पांच दिन की हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने केवल दो दिन की अनुमति दी। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। वहीं, CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने नेताओं की हिरासत को अनुचित बताया है।
CJP Leaders: दिल्ली स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने CJP (सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के प्रमुख नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की
न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए और बढ़ा दी है। सोमवार (19 अक्टूबर 2026) को आए इस न्यायिक आदेश के बाद अब दोनों नेताओं को 21 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में ही रहना होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोनों की हिरासत अवधि 5 दिनों के लिए बढ़ाने की अर्जी दी थी। हालांकि, अदालत ने पुलिस की दलीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल दो दिनों की ही मोहलत दी। इस मामले में अगली सुनवाई अब 21 अक्टूबर को तय की गई है।
13 अक्टूबर से जेल में हैं दोनों नेता
उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और
आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर 2026 को हिरासत में लिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
CJP का आरोप: 'जानबूझकर अटकाया जा रहा है मामला'
इस पूरी कार्रवाई पर संगठन (CJP) की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संगठन का दावा है कि उनके नेता केवल राष्ट्रध्वज फहराने और शांतिपूर्ण तरीके से नारे लगाने गए थे। CJP नेताओं का सीधा आरोप है कि प्रशासन और पुलिस के पास उनके साथियों को जेल में रखने की कोई ठोस कानूनी वजह नहीं है। इसी कारण सुनवाई की प्रक्रियाओं में देरी कर उनकी रिहाई में रोड़े अटकाए जा रहे हैं।
तुम्हारी कॉल्स और संदेशों की याद आ रही है..."
सुनवाई से ठीक पहले CJP नेता अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर अपने दोनों सहयोगियों के नाम एक बेहद भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा:
"आज आप दोनों का जेल में छठा दिन है। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि मुझे आपकी कितनी याद आ रही है। पिछले तीन महीनों से दिन-रात कभी भी आने वाली आपकी परेशान करने वाली कॉल्स और मैसेज की मुझे आदत हो गई थी। अक्सर मैं उनमें से कई संदेशों को टाल देता था, क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था कि मेरे बिना भी तुम दोनों सब कुछ संभाल लोगे—और तुम हमेशा ऐसा करते भी थे।"
अब सभी की नजरें 21 अक्टूबर को होने वाली अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ अदालत तय करेगी कि दोनों नेताओं को जमानत मिलती है या हिरासत और आगे बढ़ेगी।