पोस्टरों पर क्या लिखा है?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ये पोस्टर हिंदू जागरण मंच की ओर से लगाए गए हैं। शहर के प्रमुख रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे इन पोस्टरों के संदेशों ने लोगों का ध्यान खींचा है।
एक पोस्टर पर लिखा गया है— “बिरयानी खाओ, लेकिन हिंदू दुकानों से।”
वहीं, दूसरे पोस्टर पर अपील की गई है— “हिंदू दुकानदारों से ही मांस खरीदें।”
इन पोस्टरों के सामने आने के बाद सामाजिक ताने-बाने और आपसी भाईचारे को लेकर बहस छिड़ गई है।
राज्य मंत्री के आवास के बाहर भी लगे पोस्टर
यह मामला इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ रहा है क्योंकि ये पोस्टर सिर्फ आम सड़कों तक सीमित नहीं हैं। सिलीगुड़ी के भारत नगर इलाके में 'तरुण तीर्थ क्लब' द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा मैदान के ठीक सामने, जहाँ राज्य मंत्री शंकर घोष का आवास है, वहाँ भी यह विवादित पोस्टर देखा गया है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन पोस्टरों को लगाने का उद्देश्य किसी समुदाय का विरोध करना नहीं, बल्कि 'हिंदू एकता' का संदेश देना और स्थानीय हिंदू व्यापारियों को बढ़ावा देना है।
विपक्ष का हमला: "धर्म के नाम पर नफरत फैलाने की कोशिश"
इस पूरे प्रकरण के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक भट्टाचार्य ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा:
"आरएसएस और उससे जुड़े संगठन धर्म के नाम पर समाज में नफरत और बंटवारा फैलाने का काम कर रहे हैं। कौन व्यक्ति क्या खाता है, कहाँ से सामान खरीदता है और किससे व्यापार करता है—यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है। चाहे कोई हिंदू हो, मुस्लिम हो, बंगाली, बिहारी या मारवाड़ी, सभी को अपनी पसंद से जीने का अधिकार है।"
स्थिति पर नजर
फिलहाल, इन पोस्टरों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है, ताकि शहर की शांति और सौहार्द पर कोई असर न पड़े। वहीं, सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक, इस मुद्दे पर लोगों के बीच तीखी बहस जारी है।







