Office Politics: ऑफिस की दुनिया बाहर से जितनी सामान्य दिखती है, अंदर की राजनीति उतनी ही पेचीदा होती है। यहाँ कब समीकरण बदल जाएं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। कई बार हम देखते हैं कि कुछ कर्मचारियों को अपने काम से ज्यादा 'बॉस के करीब होने' का फायदा मिलता है। ऐसे लोगों को लगता है कि अगर बॉस की कृपा बनी रही, तो उनकी नौकरी और करियर पर कभी कोई आंच नहीं आ सकती। लेकिन क्या यह भरोसा वाकई स्थायी होता है? हाल ही में डिजिटल क्रिएटर और करियर कोच रचना सिंह ने ऑफिस पॉलिटिक्स से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जो इस भ्रम की असलियत को सामने लाता है।
जब एक ही बॉस के दो अलग रूप दिखे
रचना सिंह बताती हैं कि अपने करियर के शुरुआती दौर में वह एक ऐसी कंपनी में काम करती थीं, जहाँ उनकी और एक अन्य सहकर्मी की रिपोर्टिंग एक ही बॉस को थी। उस कलीग की बॉस के साथ गजब की ट्यूनिंग थी, जबकि रचना उस कंपनी में नई थीं। उस सहकर्मी का रवैया अक्सर थोड़ा सख्त रहता था, लेकिन किसी की उसे कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती थी; क्योंकि सबको पता था कि बॉस का सीधा हाथ उसके सिर पर है।
जब तक गाड़ी पटरी पर है, सब सही लगता है
दफ्तरों में अक्सर यह गलतफहमी घर कर जाती है कि निजी संबंध ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच हैं। उस सहकर्मी को भी यही लगता था कि उसकी पहुंच और बॉस से नजदीकी उसकी नौकरी की पक्की गारंटी है। जब तक स्थितियां अनुकूल थीं, तब तक सब कुछ ठीक चल रहा था। उसे कभी इस बात का अहसास ही नहीं हुआ कि हालात कभी भी पलट सकती है।
मैनेजमेंट बदलते ही पलट गया पूरा खेल
असली परीक्षा तब शुरू हुई जब कंपनी में नया मैनेजमेंट आ गया। नए उच्च अधिकारियों को उस पुरानी सहकर्मी का काम और उसका कार्य-व्यवहार पसंद नहीं आया। ऐसे समय में उम्मीद यह की जा रही थी कि जिस बॉस के साथ उसके बरसों से गहरे रिश्ते थे, वह उसे बचाने के लिए आगे आएगी। लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। बॉस ने उसे बचाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। कंपनी में नए सीईओ आ चुके थे और बॉस खुद को उनके सामने बेहतर स्थिति में रखना चाहती थीं। ऐसे में, अपनी कुर्सी और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने पुरानी कलीग का साथ देने के बजाय नए मैनेजमेंट के साथ चलना ही बेहतर समझा। जिस कर्मचारी को लगता था कि बॉस उसके लिए ढाल बनेंगी, उसे आखिरकार कंपनी से बाहर होना पड़ा।करियर में लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो क्या करें?
रचना सिंह की इस कहानी से हर नौकरीपेशा व्यक्ति को एक स्पष्ट सीख मिलती है:
- सिर्फ एक रिश्ते पर निर्भर न रहें: बॉस के साथ अच्छे संबंध होना अच्छी बात है, लेकिन अपनी पूरी नौकरी की सुरक्षा को किसी एक व्यक्ति के भरोसे न छोड़ें।
- प्रोफेशनल दायरा बढ़ाएं: ऑफिस में सिर्फ एक शख्स को खुश करने के बजाय अपनी टीम, दूसरे विभागों और सहकर्मियों के साथ भी मजबूत पेशेवर रिश्ते बनाएं।
- अपनी काबिलियत को पहचान बनाएं: किसी की कृपा के सहारे आगे बढ़ने के बजाय अपनी स्किल, काम की गुणवत्ता और परफॉर्मेंस को अपनी असली पहचान बनाएं, ताकि हालात बदलने पर भी कंपनी को आपकी जरूरत महसूस हो।







