Chanakya Niti: जिंदगी में हर बात हर किसी के साथ साझा करना हमेशा बुद्धिमानी नहीं होती। कई बार हम अति-उत्साह या जरूरत से ज्यादा भरोसा करके अपनी बेहद निजी बातें, पारिवारिक कलह या आने वाली योजनाएं दूसरों के सामने उजागर कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि बाद में वही बातें हमारे खिलाफ इस्तेमाल होती हैं या हमारे लिए नई मुसीबत खड़ी कर देती हैं। महान कूटनीतिज्ञ और नीतिकार आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले ही गोपनीयता और सही वक्त पर बोलने की कला का महत्व समझा दिया था। चाणक्य नीति के 14वें अध्याय में एक श्लोक के जरिए ऐसी 5 खास बातों का जिक्र मिलता है, जिन्हें एक समझदार इंसान को हमेशा अपने तक ही सीमित रखना चाहिए।
खुद का आजमाया घरेलू नुस्खा या औषधि
चाणक्य के अनुसार, यदि आपने स्वयं कोई विशेष औषधि या असरदार नुस्खा तैयार किया है, तो उसकी जानकारी हर किसी को बिना वजह नहीं देनी चाहिए। इसे अगर आज के संदर्भ में देखें, तो बिना डॉक्टरी सलाह के अपने व्यक्तिगत अनुभव या नुस्खों को दूसरों पर आजमाना जोखिम भरा हो सकता है। हर व्यक्ति का शरीर और उसकी स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी बांटने में सावधानी बरतनी चाहिए।
अपने धर्म-कर्म और दान का दिखावा
पुण्य और धार्मिक कार्यों का सबसे बड़ा नियम यही है कि उन्हें निस्वार्थ भाव से किया जाए। चाणक्य कहते हैं कि अपनी पूजा-पाठ, दान या किसी की मदद का ढिंढोरा कभी नहीं पीटना चाहिए। मदद करने के बाद बार-बार उसका जिक्र करने से उस कार्य का नैतिक और धार्मिक महत्व खत्म हो जाता है। सच्चा दान वही है जो खामोशी से किया जाए। घर की बातें और पारिवारिक कलह हर घर में छोटे-मोटे मतभेद और परेशानियां होती हैं। चाणक्य नीति की सलाह है कि घर के दोष या झगड़ों की चर्चा कभी भी बाहरी लोगों से न करें। हर कोई आपकी समस्या को सहानुभूति से नहीं देखता; कई लोग इसका फायदा उठाने या पीठ पीछे मज़ाक उड़ाने से भी बाज नहीं आते। घर के मामलों का हल घर के भीतर ही तलाशा जाना चाहिए।परिवार की परेशानियों को हर किसी से साझा न करें
हर घर में छोटे-मोटे मतभेद और परेशानियां होती हैं। चाणक्य नीति की सलाह है कि घर के दोष या झगड़ों की चर्चा कभी भी बाहरी लोगों से न करें। हर कोई आपकी समस्या को सहानुभूति से नहीं देखता; कई लोग इसका फायदा उठाने या पीठ पीछे मज़ाक उड़ाने से भी बाज नहीं आते। घर के मामलों का हल घर के भीतर ही तलाशा जाना चाहिए।

