Diwali Puja Muhurat: रोशनी के महापर्व पर आज लक्ष्मी पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, सही विधि और गोवर्धन पूजा की तिथियां
Diwali Puja Muhurat: दीपावली का पर्व आज 8 नवंबर को देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जानें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, दीपक जलाने के नियम और 10 नवंबर को मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा का महत्व व शुभ समय।
Diwali Puja Muhurat: कार्तिक मास की अमावस्या के पावन अवसर पर आज पूरे देश में दीपावली का महापर्व अपार श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह ऐसा पावन दिन माना जाता है जब मां लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश स्वयं भक्तों के घर पधारकर
सुख-समृद्धि, आरोग्य और रिद्धि-सिद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना और पंचांग के अनुसार, आज लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न का समय सबसे मंगलकारी माना जाता है।
- अमावस्या तिथि की शुरुआत: 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से।
- अमावस्या तिथि की समाप्ति: 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक।
- लक्ष्मी पूजन का मुख्य प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक (स्थान के अनुसार 10-15 मिनट का अंतर संभव)।
- महानिशीथ काल (तांत्रिक एवं विशेष पूजा का समय): रात 11:39 बजे से 12:31 AM तक।
लक्ष्मी पूजन की प्रामाणिक विधि
पूजा की तैयारी के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें। उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। स्थापना: चौकी पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, माता सरस्वती और कुबेर जी की प्रतिमा स्थापित करें।
संकल्प व आह्वान: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प लें और सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें।
कलश स्थापना: चौकी के पास चावल की ढेरी पर तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें, जिसमें जल, दूर्वा, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें।
अभिषेक व वस्त्र: प्रतिमाओं पर गंगाजल छिड़कें और वस्त्र अर्पित करें।
भोग व सिंगार: मां लक्ष्मी को कमल का फूल, कलावा, रोली, चावल, कौड़ियां, कमल गट्टे, बताशे, खीर और फल अर्पित करें।
आरती और पूजन के जरूरी नियम
शास्त्रों में लक्ष्मी पूजन के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना बेहद फलदायी होता है:
दिशा का ध्यान: पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
दीपक की संख्या और व्यवस्था: मां लक्ष्मी के समक्ष सबसे पहले एक चौमुखा देसी घी का बड़ा दीपक जलाएं, जो पूरी रात जलता रहे। इसके बाद 11, 21 या 31 तेल/घी के दीपक जलाकर घर के विभिन्न कोनों में रखें।
आरती का क्रम: आरती हमेशा पहले भगवान गणेश की करें, उसके बाद मां लक्ष्मी की आरती गाएं।
शांति व एकाग्रता: आरती के समय अधिक जोर-जोर से तालियां न बजाएं और न ही अत्यधिक घंटी बजाएं, क्योंकि मां लक्ष्मी को शांत वातावरण प्रिय माना जाता है।
अखंड प्रकाश: पूजा स्थल पर रात भर रोशनी बनी रहनी चाहिए, अंधेरा न होने दें।
गोवर्धन पूजा
दीपावली के बाद आने वाला गोवर्धन उत्सव (अन्नकूट) इस बार मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू हो रही है और यह 10 नवंबर को दोपहर 2:00 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के नियम का पालन करते हुए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को ही मनाई जाएगी।
गोवर्धन पूजा प्रात:काल मुहूर्त: 10 नवंबर को सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक।
धार्मिक मान्यता:
इस दिन भगवान श्री कृष्ण द्वारा ब्रजवासियों को इंद्र देव के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा स्मरण की जाती है। इस दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का रूप बनाया जाता है, जिसकी विधि-विधान से पूजा की जाती है और भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों (अन्नकूट) का भोग लगाया जाता है।