Uttarakhand Temple: प्रसिद्ध तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए धार्मिक परंपराओं और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से फूलों से सजाया गया। कपाट बंद होने के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी कराई। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच भक्तिमय माहौल बना रहा।
तीन पड़ावों में मक्कूमठ पहुंचेगी भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए प्रस्थान कर लिया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली का पहला रात्रि पड़ाव चोपता में होगा। इसके बाद 7 नवंबर को डोली भनकुण्ड पहुंचेगी। वहीं, 8 नवंबर को भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली मक्कूमठ स्थित श्री मर्कटेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। इसके साथ ही शीतकाल के दौरान भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान मक्कूमठ में ही संपन्न किए जाएंगे।
पंचकेदारों में तीसरे केदार के रूप में पूजनीय है तुंगनाथ धाम
भगवान तुंगनाथ का मंदिर पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। समुद्र तल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह धाम दुनिया के सबसे ऊंचाई पर बने शिव मंदिरों में प्रसिद्ध है।
6 नवंबर को ही बंद हुए कपाट, मक्कूमठ में होंगे दर्शन
इस वर्ष कपाट बंद होने की तारीख का पिछले वर्षों से भी विशेष संयोग रहा। वर्ष 2019 और 2025 में भी तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हुए थे। इस साल भी इसी तारीख को कपाट बंद किए गए। अब आगामी शीतकाल में श्रद्धालु भगवान तुंगनाथ के दर्शन मक्कूमठ स्थित शीतकालीन गद्दीस्थल पर कर सकेंगे।












