Ayodhya Deepotsav: 30 लाख दीयों से जगमगाई रामनगरी, बना नया रिकॉर्ड, लेजर और 2100 ड्रोन शो ने मोहा मन
Ayodhya Deepotsav: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी में 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीप जलाए गए। 2,100 ड्रोन शो, सरयू महाआरती और लेजर शो रहे आकर्षण।
प्रकाशित: 08 Nov 2026, 08:56 AM· 4 मिनट पढ़ने का समय
अयोध्या
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Ayodhya Deepotsav: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या इस बार फिर एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। दीपोत्सव 2026 के भव्य अवसर पर सरयू के तटों से लेकर ऐतिहासिक 'राम की पैड़ी' तक का पूरा इलाका लाखों दीयों की अलौकिक रोशनी से नहा उठा। इस साल लगभग 30 लाख मिट्टी के दीये एक साथ जलाकर एक नया विश्व कीर्तिमान कायम करने का लक्ष्य रखा गया। दीवाली की पूर्व संध्या पर आयोजित इस अविस्मरणीय महाउत्सव में आस्था, आधुनिकता और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।
दिग्गजों की मौजूदगी में हुई श्रीरामलला की उतारी गई आरती
इस ऐतिहासिक आयोजन की गरिमा बढ़ाने के लिए देश और प्रदेश की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष रूप से मौजूद रहे। सभी दिग्गजों ने मिलकर प्रभु श्रीरामलला के स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और महाआरती उतारी। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंददेव गिरि भी मौजूद रहे, जिन्होंने समारोह में पहुंचे उपराष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया।
56 घाटों पर बिखरी दीयों की आभा, 2151 वेदपाठियों ने की महाआरती
साल 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से अयोध्या में दीपोत्सव को हर साल एक नए मुकाम पर ले जाया जा रहा है। इस बार सरयू नदी के 56 अलग-अलग घाटों को दीयों की रोशनी से सजाया गया। राम की पैड़ी पर तो जैसे पूरा शहर ही उमड़ पड़ा। जब लाखों दीये एक साथ प्रज्ज्वलित हुए, तो घाटों पर फैला प्रकाश देखकर वहां मौजूद हर श्रद्धालु भावविभोर हो उठा। लोग इस विहंगम और अलौकिक दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए उत्सुक नजर आए। 2,151 वेदाचार्यों और पुरोहितों द्वारा एक साथ की गई सरयू महाआरती के शंखनाद ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आसमान में गूंजी रामगाथा: 2100 स्वदेशी ड्रोन और लेजर शो ने बांधा समां
पारंपरिक दीयों के प्रकाश के साथ-साथ इस बार आधुनिक तकनीक का भी शानदार समावेश देखने को मिला। आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण आसमान में हुआ भव्य ड्रोन शो रहा, जिसमें 2,100 स्वदेशी ड्रोन ने एक साथ उड़ान भरी। इन रोशन ड्रोन की मदद से हवा में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े कई मुख्य प्रसंगों की सजीव आकृतियां बनाई गईं। इसके साथ ही घाटों पर आयोजित लेजर शो और रंग-बिरंगी लाइटिंग ने वहां मौजूद लाखों लोगों का मन मोह लिया। सरयू के जल में प्रतिबिंबित होती यह रंगीन रोशनी अयोध्या के दीपोत्सव की भव्यता को और भी खास बना रही थी।
500 सालों के संघर्ष और त्याग की प्रदर्शनी
दीपोत्सव केवल एक सांस्कृतिक उत्सव ही नहीं, बल्कि आस्था के कड़े संघर्ष का प्रतीक भी बना। कार्यक्रम स्थल पर एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें राम मंदिर निर्माण के 500 वर्षों से भी लंबे कड़े संघर्ष, आंदोलनों और इसके ऐतिहासिक घटनाक्रमों को बहुत ही बारिकी से प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को मंदिर आंदोलन के लंबे इतिहास और त्याग से रूबरू कराना था।
अयोध्या के कण-कण में रचे-बसे हैं श्रीराम-सीएम योगी
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत की अमर संस्कृति का हृदय है। उन्होंने कहा, "अयोध्या के कण-कण में भगवान राम बसे हैं। प्रभु श्री राम केवल हमारी धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना, नीति और आत्मसम्मान के मूल आधार हैं।"
पुष्पक विमान के रूप में उतरा हेलीकॉप्टर, जीवंत हुआ त्रेतायुग का दृश्य
समारोह के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब लगा मानो त्रेतायुग का दृश्य जीवंत हो उठा हो। लंका विजय के बाद भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के अयोध्या आगमन की कथा को साकार करने के लिए उनके स्वरूपों को एक विशेष हेलीकॉप्टर (पुष्पक विमान के प्रतीक) से सरयू तट पर उतारा गया। हेलीकॉप्टर के उतरते ही हनुमान का रूप धरे नन्हें बच्चों और संतों ने उनका जयकारों के साथ स्वागत किया। भक्ति, आधुनिक लेजर शो, वेद ध्वनि और लाखों दीपकों के इस महासंगम ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने अयोध्या के दीपोत्सव को अलौकिक और अविस्मरणीय बना दिया।