Chhattisgarh Smart Meter: बिना टेंडर टाटा पावर को काम देने की तैयारी, मीटर ठेके पर बवाल
Chhattisgarh Smart Meter: छत्तीसगढ़ में करीब 4,000 उच्च दाब (HT) औद्योगिक उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद शुरू हो गया है। प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बिना ओपन टेंडर के यह काम टाटा पावर को सौंपने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने पावर कंपनी के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और प्रस्तावित प्रक्रिया रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस ने मौजूदा AMR सिस्टम का हवाला देते हुए हितों के टकराव की आशंका जताई है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं माने जाने पर ऊर्जा मंत्री, राज्यपाल और हाई कोर्ट का रुख किया जाएगा।
Chhattisgarh Smart Meter: छत्तीसगढ़ पावर कंपनी में स्मार्ट मीटर लगाने की कवायद शुरू होते ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश के करीब 4,000 उच्च दाब (एचटी) औद्योगिक उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं।
कांग्रेस का गंभीर आरोप है कि राज्य की बिजली कंपनी बिना किसी खुली निविदा (ओपन टेंडर) के यह करोड़ों का काम निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा पावर को सौंपने जा रही है। विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर सरकारी खजाने में सेंध और वित्तीय नियमों की अनदेखी करार दिया है।
पावर कंपनी चेयरमैन को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। कन्हैया अग्रवाल ने इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि बिजली कंपनी और राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचाने की सोची-समझी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने माँग की है कि इस फैसले के पीछे जो भी अधिकारी शामिल हैं, उनके खिलाफ
निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बैठाई जाए।
15 साल पुरानी चलती व्यवस्था को बंद करने पर सवाल
कांग्रेस नेता ने मौजूदा सिस्टम पर बात करते हुए कहा कि साल 2010 में बाकायदा ओपन टेंडर के जरिए प्रदेश में आटोमैटिक मीटर रीडिंग (AMR) सिस्टम लागू किया गया था।
गुढ़ियारी (रायपुर) स्थित सेंट्रल कंट्रोल रूम से पिछले 15 सालों से सभी बड़े औद्योगिक कनेक्शनों की ऑनलाइन रीडिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग बिल्कुल सही तरीके से चल रही है।
ऐसे में अचानक, बिना किसी ठोस तकनीकी कारण के, इस करोड़ों की चालू व्यवस्था को दरकिनार कर नया ठेका देने की हड़बड़ी कई सवाल खड़े करती है।
हितों का टकराव': टाटा पावर को ठेका देने पर आपत्ति
कांग्रेस ने इस मामले में 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (हितों के टकराव) का मुद्दा भी ज़ोर-शोर से उठाया है।
कांग्रेस का दावा: टाटा पावर ने 4 दिसंबर 2025 को खुद रायपुर क्षेत्र में बिजली वितरण लाइसेंस (Power Distribution License) के लिए आवेदन किया है। ऐसे में जो कंपनी खुद बाजार में एक प्रतिस्पर्धी के रूप में उतरना चाहती है, उसी को प्रदेश के औद्योगिक उपभोक्ताओं का मीटरिंग और डेटा कंट्रोल सौंपना पूरी तरह से गलत है। इससे कंपनी को अनुचित लाभ मिलेगा और उपभोक्ताओं समेत विद्युत मंडल को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
सड़क से लेकर हाई कोर्ट तक की चेतावनी
कन्हैया अग्रवाल ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस फैसले को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस शांत नहीं बैठेगी। इस मामले को जल्द ही राज्य के ऊर्जा मंत्री और राज्यपाल के सामने उठाया जाएगा। इसके बावजूद अगर प्रबंधन ने यह मनमाना फैसला रद्द नहीं किया, तो प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया जाएगा।