Illegal Plotting in Kendul: पटवारी कार्यालय के ठीक सामने सरकारी नहर पाटकर काट दिए प्लॉट, सिंचाई पर मंडराया संकट
Illegal Plotting in Kendul: रायपुर के पास ग्राम केंदुल में शासकीय नहर की जमीन को मुरुम और मलबे से पाटकर रास्ता बनाने तथा कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग किए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने इससे सिंचाई और जल निकासी प्रभावित होने की आशंका जताई है। शिकायत के बाद कलेक्टर ने संबंधित खसरों को ब्लॉक करने और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
Illegal Plotting in Kendul: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे ग्राम केंदुल में प्रशासनिक सुस्ती और मिलीभगत की एक हैरान करने वाली बानगी सामने आई है। यहाँ नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर शासकीय नहर की जमीन को ही पाट दिया गया और उस पर धड़ल्ले से
अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है। सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि यह सब किसी दूर-दराज के इलाके में नहीं, बल्कि ठीक पटवारी कार्यालय के सामने हो रहा है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूंदे बैठे रहे।
नहर को मुरुम से पाटकर बनाया रास्ता, किसानों की बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक, खसरा नंबर 116/3, 117/4 और 117/5 पूरी तरह से शासकीय नहर मद की भूमि है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने इस नहर में भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा डलवाकर इसका रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया, ताकि प्रस्तावित प्लाटिंग तक आसानी से पहुँच मार्ग (रोड) बनाया जा सके। यह नहर स्थानीय किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुँचाने और जल निकासी में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नहर के बंद हो जाने से आने वाले दिनों में किसानों के सामने खेतों की सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, बरसात के मौसम में आसपास के इलाकों में जलभराव और
किसानों की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका भी गहरा गई है। ग्रामीणों ने इस नहर को तत्काल इसके मूल स्वरूप में बहाल करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
इन खसरों पर चल रहा अवैध प्लाटिंग और रजिस्ट्री का खेल
शिकायत में जिन जमीनों पर बिना वैधानिक अनुमति के प्लॉट काटे जाने का उल्लेख है, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित खसरे शामिल हैं:
प्रमुख खसरे: 116/1, 116/2, 116/4, 116/5 और 117/1, 117/2, 117/3 तथा 117/6।
प्रमुख नाम: इस पूरे मामले में प्यारेलाल वर्मा, शंकरलाल वर्मा, नीलमणी वर्मा, ओमप्रकाश श्रीवास, मुरलीधर वर्मा और एजाज अली के नाम सामने आए हैं।
प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आई है कि कृषि भूमि का विधिवत डायवर्शन (डायवर्सन) कराए बिना और कॉलोनी विकास की जरूरी अनुमति लिए बगैर ही यहाँ धड़ल्ले से प्लॉट काट दिए गए। यहाँ तक कि जमीनों की खरीद-फविक्री और रजिस्ट्री होने की चर्चा भी है, जिसकी सत्यता की पुष्टि संबंधित राजस्व अभिलेखों और पंजीयन दस्तावेजों के जरिए होना अनिवार्य है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई, कलेक्टर ने दिए निर्देश
इस गंभीर मामले की शिकायत सबसे पहले कलेक्टर जनदर्शन में की गई थी। इसके बाद पटवारी उमा प्रधान ने कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट भेजकर खानापूर्ति तो कर दी, लेकिन मैदानी स्तर पर प्लाटिंग या नहर पाटने के अवैध काम को रुकवाने के लिए कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित लापरवाह राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई करने और विवादित जमीन के खसरों को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन की इस सख्ती के बाद जमीन पर किस तरह की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाती है।