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JP Hospital building(Image Source: social media)
JP Hospital building(Image Source: social media)
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JP Hospital: 26 करोड़ की बिल्डिंग बदहाल, डेढ़ साल से बंद, शराब की बोतलें और वाहनों का कब्जा

JP Hospital: करीब 26 करोड़ रुपए की नई पांच मंजिला इमारत डेढ़ साल से बंद पड़ी है। मरीजों के लिए प्रस्तावित नई सुविधाएं शुरू नहीं हो पाई हैं, जबकि परिसर में शराब की बोतलें और वाहनों की पार्किंग से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

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प्रकाशित: 04 Sep 2026, 06:58 PM · अपडेट: 13 Oct 2026, 08:25 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
JP Hospital: मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज की सुविधा देने के उद्देश्य से करीब 26 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई पांच मंजिला नई इमारत अब खुद बदहाली की स्थिति में पहुंचती नजर आ रही है। करीब डेढ़ साल से बंद पड़े इस भवन को मरीजों के लिए शुरू करने की कई समय-सीमाएं तय की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक इसका शुभारंभ नहीं हो सका है। नई इमारत शुरू नहीं होने का सीधा असर अस्पताल आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। 
दूसरी ओर लंबे समय से बंद पड़े भवन के आसपास असामाजिक तत्वों की आवाजाही की शिकायतें सामने आ रही हैं। परिसर में शराब की बोतलें दिखाई देने के साथ ही भवन के पोर्च में मोटरसाइकिल और कारें खड़ी की जा रही हैं।

तारीखें तय, सेवाएं अब भी बंद

इससे भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कई बार तय हुई डेडलाइन, फिर भी शुरू नहीं हुई सेवाएं जेपी अस्पताल की नई इमारत को शुरू करने के लिए प्रशासन की ओर से कई बार समय-सीमा तय की गई। इसके बावजूद सितंबर 2026 शुरू होने के बाद भी मरीजों को यहां शिफ्ट करने या नई सेवाएं शुरू करने को लेकर कोई ठोस गतिविधि नजर नहीं आ रही है। इससे पहले नवंबर 2025 में भी भवन के शुरू नहीं होने का मामला सामने आया था।
उस समय भवन को अस्पताल प्रशासन को सौंपने और कुछ तकनीकी कमियों से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण शुरुआत अटकी होने की बात सामने आई थी। समय बीतने के बावजूद अब तक यह इमारत मरीजों के लिए उपयोग में नहीं आ सकी है।

270 से 240 बेड की योजना

240 से 270 बिस्तरों तक की थी योजना जेपी अस्पताल परिसर में पुराने भवन के पास तैयार की गई इस पांच मंजिला इमारत का निर्माण अस्पताल में बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए किया गया था। शुरुआती प्रस्ताव में करीब 270 बिस्तरों की व्यवस्था और चार आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाने की योजना थी। बाद की योजना में भवन की क्षमता 240 बिस्तर बताई गई। इमारत में इमरजेंसी, सर्जरी, अलग-अलग मरीज वार्ड और जांच से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना थी। इसके अलावा चार ऑपरेशन थिएटर और एक मंजिल पर ब्लड बैंक शुरू करने का प्रस्ताव भी शामिल था। वर्ष 2024 की योजना के मुताबिक भवन की लागत करीब 26 करोड़ रुपए थी, जिसमें लगभग 19 करोड़ रुपए राज्य सरकार और करीब 7 करोड़ रुपए केंद्र सरकार की हिस्सेदारी बताई गई थी।

विधानसभा में उठा भवन का मुद्दा

विधानसभा में भी उठा था भवन का मुद्दा इस भवन का उल्लेख मध्यप्रदेश विधानसभा की फरवरी 2026 की कार्यवाही में भी हुआ था। विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक भवन की तीन मंजिलों पर सर्जरी और हड्डी रोग विभाग शुरू करने की योजना बताई गई थी, जबकि ऊपर की दो मंजिलों के उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ था। भवन में आगे चलकर हृदय रोग, कैंसर और फिजियोथेरेपी जैसी सेवाएं शुरू करने के सुझाव भी सामने आए थे। ऐसे में नई इमारत के शुरू होने से जेपी अस्पताल में मरीजों को पहले की तुलना में अधिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी।

खाली भवन, मरीजों पर बढ़ता दबाव

खाली भवन, पुराने अस्पताल पर बढ़ता दबाव नई बिल्डिंग का निर्माण होने के बावजूद इसका इस्तेमाल शुरू नहीं होने से अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। मरीज और उनके परिजन अभी पुराने भवन की सीमित जगह में इलाज कराने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपए की लागत से तैयार नई इमारत खाली पड़ी है। बंद भवन के पोर्च में वाहनों की पार्किंग और परिसर में शराब की बोतलें मिलने जैसी स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर इतने लंबे समय से बंद इस इमारत की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।

नई बिल्डिंग कब खुलेगी?

मरीजों के लिए तैयार की गई करोड़ों रुपए की इमारत अगर इसी तरह बंद रहती है तो एक ओर सरकारी संसाधनों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर मरीजों को उन सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा, जिनके लिए इस भवन का निर्माण किया गया था। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जेपी अस्पताल की नई इमारत मरीजों के लिए आखिर कब खोली जाएगी।
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