Raigarh Wood Smuggling: खैर-तेंदू की बेशकीमती लकड़ी की तस्करी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार
Raigarh Wood Smuggling: खैर और तेंदू की अवैध लकड़ी कटाई व तस्करी करने वाले इंटरस्टेट नेटवर्क का पुलिस और वन विभाग ने खुलासा किया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी फरार है। जांच में फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट (TP) के जरिए अवैध लकड़ी को वैध बताकर दूसरे राज्यों में भेजने की बात सामने आई है।
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कीर्तिमान डेस्क | यशोदा साहू
04 Sep 2026, 05:52 PM
रायगढ़
Raigarh Wood Smuggling: जंगलों से खैर और तेंदू की कीमती लकड़ी काटकर दूसरे राज्यों में भेजने वाले एक संगठित नेटवर्क का पुलिस और वन विभाग ने खुलासा किया है। जांच के दौरान सामने आए इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों—रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान—को गिरफ्तार किया है। वहीं, मामले का एक अन्य आरोपी भरत कुमार मेश्राम फरार बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार इलाके के जंगलों में सक्रिय था। आरोप है कि ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर जंगल से लकड़ी कटवाई जाती थी। इसके बाद लकड़ी को गढ़उमरिया के एक गोदाम में लाकर जमा किया जाता और मशीनों से उसकी छिलाई की जाती थी। तैयार लकड़ी को ट्रांसपोर्ट के जरिए हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भेजे जाने की बात जांच में सामने आई है।
फर्जी TP के सहारे अवैध लकड़ी को वैध दिखाने की कोशिश
जांच में पुलिस और वन विभाग को लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में भी गड़बड़ी मिली। आरोपियों की ओर से पेश किए गए ट्रांसपोर्ट परमिट (TP) की जांच के दौरान संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। वन विभाग ने दस्तावेज को प्रथम दृष्टया फर्जी मानते हुए मामले की जानकारी पुलिस को दी। आरोप है कि इसी तरह के दस्तावेजों का इस्तेमाल अवैध रूप से काटी गई लकड़ी को वैध बताकर दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। इस मामले की शुरुआत 5 मई 2025 को हुई कार्रवाई से जुड़ी है। उस समय वन विभाग की टीम ने जामटीकरा, गढ़उमरिया स्थित नरेश अग्रवाल के गोदाम में दबिश दी थी। बताया गया कि गोदाम को रोहित मित्तल ने किराए पर लिया था। कार्रवाई के दौरान गोदाम और वहां खड़े ट्रक से खैर और तेंदू की लकड़ी बरामद की गई थी। मौके से कटर मशीन समेत अन्य सामान भी जब्त किया गया। SSP शशि मोहन सिंह के अनुसार, गोदाम में तेंदू के 42 लट्ठे भी मिले थे। कार्रवाई के दौरान रोहित मित्तल अपने साथियों के साथ मौके से निकल गया था।
जब्त लकड़ी को ले जाने के लिए आरोपियों ने वन अमले के सामने ट्रांसपोर्ट परमिट प्रस्तुत किया था। विभागीय जांच में दस्तावेज पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। इसके बाद TP की जांच कराई गई, जिसमें वह प्रथम दृष्टया फर्जी पाया गया। मामले की आगे जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए वन विभाग के रेंजर ने 2 सितंबर को जूटमिल थाने में आवेदन दिया। इसके आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी और वन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
अवैध खैर तेंदू लकड़ी बरामदअलग-अलग लोगों को सौंपी गई थी नेटवर्क में भूमिका
पुलिस की जांच के अनुसार, गढ़उमरिया में गोदाम लेकर लकड़ी का स्टॉक करने की जिम्मेदारी रोहित मित्तल से जुड़ी बताई गई है। उसके बिजनेस पार्टनर मनीष अग्रवाल पर लकड़ी की छिलाई से जुड़े काम में शामिल होने का आरोप है। वहीं, भरत कुमार मेश्राम और सलाउद्दीन खान के जरिए लकड़ी को दूसरे राज्यों तक भेजे जाने की जानकारी पुलिस को मिली है। जांच में पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, भरत मेश्राम की तलाश जारी
पुलिस की विशेष टीम ने जांच के बाद रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों की भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। आरोपियों को शुक्रवार को जेल भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। वहीं, फरार आरोपी भरत कुमार मेश्राम की तलाश जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अवैध लकड़ी की कटाई, छिलाई और दूसरे राज्यों तक परिवहन में इनके अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।
SSP ने बताया संगठित नेटवर्क
SSP शशि मोहन सिंह के मुताबिक पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए पूरे मामले की जांच की है। प्रारंभिक जांच में आरोपियों के संगठित तरीके से काम करने और फर्जी TP के जरिए अवैध लकड़ी को वैध बताकर दूसरे राज्यों में भेजने की कोशिश की जानकारी सामने आई है।