Raipur News: राजधानी के शहीद स्मारक भवन में आयोजित पारस संगम 2026 श्रेष्ठता सम्मान समारोह में खरोरा के कृष्ण मानिकपुरी को सम्मानित किया गया। शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा देने और उन्हें विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए उन्हें श्रीफल, शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। उनका प्रयास बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। कृष्ण मानिकपुरी आरंग ब्लॉक के शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लगातार मार्गदर्शन दे रहे हैं।
वे बच्चों को प्रेरक भाषण देने के साथ गायन, नृत्य, रंगोली, मेहंदी और चित्रकला जैसी कलाओं का प्रशिक्षण भी देते हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों को क्रिकेट के माध्यम से खेल गतिविधियों से जोड़ने का काम कर रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा को निखारना और उन्हें अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर देना है।
पढ़ाई के साथ संस्कार और अनुशासन पर जोर
कृष्ण मानिकपुरी बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान देते हैं। वे विद्यार्थियों को माता-पिता का सम्मान करने, बड़ों की बात सुनने और अपने जीवन में अनुशासन बनाए रखने की सीख देते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। आज के दौर में मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल विद्यार्थियों की पढ़ाई और दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए वे बच्चों को मोबाइल से दूरी बनाए रखने और पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित करते हैं। वे विद्यार्थियों को समय का सही उपयोग करने तथा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक गतिविधियों में लगाने की सलाह भी देते हैं।निःशुल्क शिक्षा के जरिए बच्चों का भविष्य संवारने की पहल
शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को बिना किसी शुल्क के मार्गदर्शन देना उनकी पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गायन, नृत्य, चित्रकला और खेल जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने का मौका मिलता है। साथ ही, ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने और अपनी क्षमताओं को सामने लाने में मदद करती हैं। पारस संगम 2026 श्रेष्ठता सम्मान समारोह में मिला यह सम्मान कृष्ण मानिकपुरी के इसी प्रयास को प्रोत्साहित करने वाला है। शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के विकास के लिए किए जा रहे उनके कार्य समाज में सकारात्मक योगदान का उदाहरण हैं।






