India Foreign Policy: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-20 देशों से दुनिया में जारी संघर्षों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युद्ध का असर केवल संघर्ष में शामिल देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ता है। इसका सबसे अधिक दबाव विकासशील देशों को झेलना पड़ता है। अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारतीय पत्रकारों से चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारत का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं।
रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत की पहल
रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि भारत संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है। इस दौरान तीन प्रमुख मुद्दों पर बातचीत की जा रही है। इनमें काला सागर के रास्ते अनाज का निर्यात दोबारा शुरू करना, नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की संभावनाएं तलाशना शामिल है। जयशंकर के मुताबिक, रूस और यूक्रेन दोनों ही दुनिया के प्रमुख अनाज निर्यातक देशों में शामिल हैं। ऐसे में काला सागर से अनाज की आवाजाही प्रभावित होने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। खाद्य जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर विकासशील देशों को इसकी सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी इस विषय पर बातचीत की है। इसके अलावा वह स्वयं मॉस्को और कीव का दौरा कर चुके हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी जताई चिंता
जी-20 बैठक में ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को राजनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। इसका असर उन देशों पर अधिक पड़ता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। उन्होंने ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को रोकने की जरूरत बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सभी देशों की सहमति बनाना आसान नहीं है। अलग-अलग देशों के लिए ऊर्जा ढांचे का दायरा भी अलग है। इसमें तेल रिफाइनरी, बिजली ग्रिड और ईंधन की आपूर्ति करने वाले जहाज शामिल हो सकते हैं।
खाद्य और उर्वरक आपूर्ति पर भी चर्चा
बैठक में खाद्य सुरक्षा के साथ उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई गई। जयशंकर ने कहा कि काला सागर के अलावा खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में अस्थिरता का असर उर्वरकों की आपूर्ति पर पड़ सकता है। इससे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है। भारत ने जी-20 देशों से इन समस्याओं पर मिलकर काम करने और वैश्विक बाजार में खाद्य एवं ऊर्जा की उपलब्धता बनाए रखने का आग्रह किया।एक देश पर निर्भरता कम करने की जरूरत
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा के दौरान भारत ने उत्पादन और विनिर्माण के केंद्रों को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में विकसित करने की बात रखी। जयशंकर ने कहा कि दुनिया को किसी एक देश या क्षेत्र पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उत्पादन और आपूर्ति के सीमित केंद्र प्रभावित होते हैं, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। युद्ध और जलवायु परिवर्तन जैसी परिस्थितियां भी वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बाधित कर सकती हैं। इसलिए उत्पादन के विकल्प बढ़ाना और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना जरूरी है।







