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Foreign ministers from the Quad countries met in Atlanta, USA (Image Source: Social Media)
Foreign ministers from the Quad countries met in Atlanta, USA (Image Source: Social Media)
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Strait of Hormuz: नेपाल की मदद में भारत सबसे आगे, जयशंकर बोले, हिंद-प्रशांत में संप्रभुता से समझौता नहीं

Strait of Hormuz: अटलांटा में हुई Quad Meeting में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने चीन की व्यापारिक नीतियों पर चिंता जताई। बैठक में नेपाल बाढ़ राहत में भारत के योगदान की सराहना की गई।

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प्रकाशित: 02 Nov 2026, 02:42 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
अमेरिका
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Strait of Hormuz: अमेरिका के अटलांटा में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन की व्यापारिक नीतियों पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए गए। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। बैठक में नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों में भारत की त्वरित मदद की भी सराहना की गई। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे। क्वाड देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

नेपाल में बाढ़ के बाद भारत की मदद की सराहना 

क्वाड देशों ने नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों में भारत की त्वरित पहल की प्रशंसा की। संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत ने सबसे पहले सहायता पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। भारत की ओर से नेपाल को राहत एवं बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरणों के साथ वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई थी। क्वाड के अन्य सदस्य देशों ने भी नेपाल को दिए गए सहयोग का उल्लेख किया। इसे पड़ोसी देशों के साथ आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।

चीन की व्यापारिक नीतियों पर क्वाड ने जताई चिंता 

बैठक के संयुक्त बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन आर्थिक दबाव बनाने और व्यापारिक नियमों के खिलाफ अपनाई जा रही नीतियों पर चिंता जाहिर की गई। क्वाड देशों ने मनमाने तरीके से निर्यात पर प्रतिबंध लगाने और कुछ उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बताया। बयान में कहा गया कि ऐसी नीतियों का असर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर पड़ता है। इससे कई देशों की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। चारों देशों ने भरोसेमंद और खुली आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने के साथ मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई।

होर्मुज और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर 

जोर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भी बैठक का अहम मुद्दा रही। क्वाड देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही की जरूरत बताई। संयुक्त बयान में कहा गया कि इन समुद्री रास्तों से ऊर्जा और दूसरे जरूरी सामानों की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसके साथ ही बिना किसी बाधा या टोल के अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने की बात कही गई। क्वाड ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत नौवहन अधिकारों और समुद्री स्वतंत्रता की रक्षा करने पर भी जोर दिया।

जयशंकर बोले- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता जरूरी 

बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सभी देशों को अपनी पसंद के अनुसार फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। जयशंकर ने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने की जरूरत बताई। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय देशों की क्षमताएं बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी मिलकर काम करने की बात कही।

G20 बैठक में भी समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाया था 

क्वाड बैठक से एक दिन पहले G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भी एस. जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने नागरिक जहाजों और उन पर काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर सवाल उठाए थे। जयशंकर ने कहा था कि समुद्री रास्तों पर हमलों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार और आम लोगों की जरूरतों पर भी पड़ता है। खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों को ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर इन जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है।
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