India Japan Defence Deal: रक्षा गलियारों से एक ऐसी बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने एशियाई कूटनीति में खलबली मचा दी है। खबर है कि जापान अपनी मारक क्षमता को परखने के लिए भारत की डिफेंस टेस्ट रेंज का इस्तेमाल कर सकता है। इसके तहत टोक्यो अपनी खतरनाक लंबी दूरी की 'टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल' (जिसकी रेंज करीब 1,000 किलोमीटर है) और आधुनिक ड्रोन का परीक्षण भारत में कर सकता है। इस सिलसिले में जापानी अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय टीम ने हाल ही में भारत का दौरा किया था और संभावित परीक्षण स्थलों का जायजा लिया है।
हालांकि, अभी तक दोनों देशों के बीच कोई आधिकारिक या पक्की डील फाइनल नहीं हुई है, लेकिन इस सुगबुगाहट ने ग्लोबल मीडिया और कूटनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सबसे ज्यादा बेचैनी भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में है। पाकिस्तानी रणनीतिकार और विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं और इसके क्षेत्रीय सुरक्षा, खासकर चीन और पाकिस्तान पर पड़ने वाले प्रभावों का गुणा-गणित लगाने में जुट गए हैं।
कमर चीमा की चेतावनी: "यह चीन को नाराज करने वाला कदम है"
पाकिस्तान के जाने-माने राजनीतिक टिप्पणीकार और विश्लेषक कमर चीमा ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि जापान को अपनी जमीन और रक्षा तकनीक के परीक्षण की अनुमति देना सीधे तौर पर चीन को आंख दिखाने जैसा है। चीमा के मुताबिक, "जापान सिर्फ भारत के टेस्ट रेंज का इस्तेमाल करके चुप नहीं बैठने वाला। जैसे-जैसे दोनों देशों के रिश्ते प्रगाढ़ होंगे, वैसे-वैसे डिफेंस टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान भी बढ़ेगा।
भारत का यह कदम आने वाले समय में पाकिस्तान के लिए भी रणनीतिक मुश्किलें पैदा कर सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि भारत अपनी सेना और रक्षा साजो-सामान पर दिल खोलकर पैसा खर्च कर रहा है। इसके साथ ही वह अपनी ग्लोबल पार्टनरशिप का दायरा भी लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में जापान के रूप में उसे एक मजबूत और भरोसेमंद साथी मिल गया है। जापान को अपने हथियारों के टेस्ट के लिए स्पेस चाहिए, जो उसे भारत में आसानी से मिल रहा है; और बदले में भारत को भी तकनीकी दक्षता हासिल करने में मदद मिलेगी।
'ड्रैगन' और पाकिस्तान फैक्टर
कमर चीमा का यह भी विश्लेषण है कि भारत और जापान के बीच सुधरते और मजबूत होते रिश्तों के केंद्र में चीन और पाकिस्तान की धुरी है। जापान का झुकाव लगातार भारत के पक्ष में दिखाई देता है, क्योंकि टोक्यो को अच्छी तरह अहसास है कि चीन के मुकाबले में भारत उसका सबसे बड़ा और मददगार रणनीतिक साझेदार बन सकता है। चीमा ने कहा, "जापानी इस बात से भी भली-भांति वाकिफ हैं कि पाकिस्तान की चीन के साथ घनिष्ठता किस स्तर की है। यही वजह है कि जापान और पाकिस्तान के बीच ताल्लुक कभी सहज नहीं रहे, और इसकी सबसे बड़ी जड़ कहीं न कहीं बीजिंग यानी चीन ही है।"
आखिर क्या है जापान का मास्टरप्लान?
जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान ने इस महीने की शुरुआत में अपने चुनिंदा सैन्य अधिकारियों की एक टीम भारत भेजी थी। इन अधिकारियों ने यहां करीब एक हफ्ते तक रुककर कई संभावित जगहों का बारीकी से मुआयना किया। उनका मुख्य मकसद यह टटोलना था कि क्या भारतीय मिसाइल रेंज का इस्तेमाल लंबी दूरी के हथियारों की टेस्टिंग के लिए किया जा सकता है या नहीं। इनमें मुख्य रूप से 'टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल' और छोटे अटैक ड्रोन शामिल हैं। इस बीच, जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (GSDF) के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मासायोशी अराई का बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उनके अनुसार, जापान घरेलू स्तर पर ट्रेनिंग और टेस्टिंग के लिए जगह तलाशने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर विदेशों में भी इसके विकल्प तलाश रहा है, क्योंकि घरेलू जमीन पर लंबी दूरी के हथियारों की टेस्टिंग के लिए स्पेस की भारी कमी है।







