K9 Vajra T: 300 से अधिक तोपों की खरीद को सैद्धांतिक मंजूरी, दक्षिण कोरिया के नेक्स्ट-जेन K9A2 पर भी नजर
K9 Vajra T: भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता बढ़ाने के लिए 300 से अधिक K9 वज्र-T सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों की खरीद को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की खबर है। करीब 20,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस योजना से सेना की मारक क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, दक्षिण कोरिया में विकसित हो रहा K9A2 का उन्नत संस्करण भी चर्चा में है, जिसमें ऑटोमेशन और तेज फायरिंग जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
K9 Vajra T: भारतीय सेना की मारक क्षमता को एक और बड़ा विस्तार मिलने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने देश की आर्टिलरी आधुनिकीकरण योजना के तहत 300 से अधिक K9
वज्र-T सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों की खरीद के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस मेगा डिफेंस डील की अनुमानित लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) आंकी जा रही है। खास बात यह है कि दक्षिण कोरिया इस समय अपनी बेहतरीन K9 थंडर तोप का नेक्स्ट-जेनरेशन वेरिएंट K9A2 तैयार कर रहा है, और माना जा रहा है कि भारतीय सेना भविष्य में अपनी इन तोपों को इसी उन्नत संस्करण में अपग्रेड कर सकती है।
क्या है दक्षिण कोरिया का नया K9A2 वेरिएंट?
हनव्हा एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया जा रहा K9A2 अपनी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले बेहद आधुनिक और घातक है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
फुल-ऑटोमेशन: इसमें पूरी तरह से ऑटोमैटिक एम्युनिशन हैंडलिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक टर्रेट ड्राइव और ऑटोमैटिक फ्यूज सेटर दिए गए हैं।
तेज फायरिंग रेट: यह नया मॉडल प्रति मिनट 9 से 10 राउंड तक गोले दाग सकता है, जबकि पुराने मॉडलों की क्षमता 6 से 8 राउंड प्रति मिनट थी।
कम सैनिकों की जरूरत: ऑटोमेशन बढ़ने के कारण तोप को ऑपरेट करने के लिए जहां पहले 5 क्रू सदस्यों की जरूरत होती थी, वहीं अब केवल 3 लोग ही इसे संभाल सकते हैं।
कम्पोजिट रबर ट्रैक्स: ऊबड़-खाबड़ इलाकों में बेहतर मूवमेंट, कम वाइब्रेशन और आसान हैंडलिंग के लिए इसमें रबर ट्रैक्स का इस्तेमाल किया गया है।
ऑपरेशनल टाइमलाइन: इसे साल 2027 के आसपास पूरी तरह से ऑपरेशनल करने की तैयारी है।
भारतीय सेना और K9 वज्र का सफर
भारतीय सेना के पास फिलहाल 100 K9 वज्र तोपें पहले से सेवा में हैं। इसके अलावा, दिसंबर 2024 में 100 और गनों का ऑर्डर दिया गया था। अब 300 से ज्यादा नई तोपों के जुड़ने से
भारतीय तोपखाने की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। यह 155एमएम और 52-कैलिबर की ट्रैक वाली सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोप है। भारत में इसे लार्सन एंड टूब्रो (L&T) ने दक्षिण कोरियाई कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के साथ मिलकर गुजरात के हजीरा स्थित प्लांट में तैयार किया है। दोनों देशों के बीच इसकी नींव 25 मार्च 2012 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली म्युंग-बाक की मौजूदगी में रखे गए एमओयू के साथ पड़ी थी।
कठिन परीक्षणों के बाद चुनी गई थी K9 वज्र
भारतीय सेना ने इस तोप को शामिल करने से पहले रेगिस्तान और कठिन इलाकों में इसके कड़े ट्रायल लिए थे। उस दौरान रूसी 2S19 Msta-S तोप भी रेस में थी। K9 थंडर ने भारतीय गोला-बारूद के साथ 587 राउंड फायर करने और 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने के सभी कड़े पैमानों को सफलतापूर्वक पास किया, जबकि रूसी विकल्प इसमें खरा नहीं उतर पाया था।
मेक इन इंडिया का बेहतरीन उदाहरण
K9 वज्र-T में लगभग 14 मुख्य प्रणालियां भारत में ही निर्मित हैं, जो इसके कुल मूल्य का करीब 50% हिस्सा हैं। इसमें स्वदेशी फायर कंट्रोल सिस्टम, कम्युनिकेशन सिस्टम, एनबीसी (न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल,केमिकल) प्रोटेक्शन सिस्टम और रेगिस्तानी माहौल के अनुकूल बनाए गए बदलाव शामिल हैं।
भारतीय सेना के लिए क्यों खास है K9 वज्र-T?
यह तोप ऊंचे एंगल पर गोले दागने में सक्षम है, जिससे पहाड़ों या किसी दीवार जैसी आड़ के पीछे छिपे दुश्मन को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है।
यह 'शूट एंड स्कूट' (गोला दागकर तुरंत जगह बदलने) की क्षमता रखती है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता।
इसका वेल्डेड स्टील आर्मर क्रू सदस्यों को बारूदी सुरंगों, बम के टुकड़ों और छोटे हथियारों की फायरिंग से सुरक्षित रखता है।
इस नए ऑर्डर से न केवल भारत की सीमाई सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी यह एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा।