Indian Army Modernization: नया लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन जारी, AI और ड्रोन वॉरफेयर पर रहेगा खास जोर
Indian Army Modernization: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना का नया Land Warfare Doctrine 2026 जारी किया। इसमें ड्रोन संचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य भविष्य के युद्धों और बदलती सामरिक चुनौतियों से निपटने के लिए सेना की तैयारियों को मजबूत करना है।
Indian Army Modernization: भारतीय सेना ने भविष्य के युद्धों और सामरिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के शीर्ष नीति-निर्धारक मंच
'आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस' के समापन समारोह में 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन 2026' (Land Warfare Doctrine 2026) को आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया। यह नया सिद्धांत आने वाले दशकों में देश की सैन्य तैयारियों और रणनीतिक रूपरेखा की दिशा तय करेगा।
भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही सेना
नए सिद्धांत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आधुनिक तकनीकों को जमीनी स्तर पर उतारने पर जोर दिया गया है। इसके तहत सेना के सभी 12 लाख जवानों के पूरे बल के लिए 'ड्रोन संचालन' (Drone Operations) को एक बुनियादी कौशल के रूप में अपनाया जाएगा। साथ ही, सैन्य अधिकारियों को सामरिक और रणनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस नए डॉक्ट्रिन में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, सटीक निशाना साधने की क्षमता (Precision Targeting), और मानवरहित प्रणालियों के तालमेल को प्राथमिकता दी गई है।
युद्ध के बदलते स्वरूप और 'इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर' पर फोकस
आज के दौर में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक लड़ाइयों की जगह अब मानवरहित प्रणालियों, चौबीसों घंटे निगरानी (Continuous Surveillance), बाधित संचार (Jammed Communications) और सूचना युद्ध (Information Warfare) ने ले ली है। रक्षा मंत्री द्वारा जारी यह नया सिद्धांत युद्ध के मैदान की इन्हीं बदलती वास्तविकताओं को पूरी तरह से संबोधित करता है।
अगले 20-30 वर्षों की दीर्घकालिक रणनीति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने पोस्ट के जरिए इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश को अगले 20 से 30 वर्षों के लिए एक ठोस दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने भारतीय सेना के वरिष्ठ नेतृत्व से आग्रह किया कि वे तात्कालिक सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य में उभरने वाले संभावित खतरों से निपटने के लिए भी पूरी तरह मुस्तैद रहें।
सेना के पुनर्गठन की समीक्षा और यूएन शांति सैनिकों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने सेना के चल रहे पुनर्गठन प्रयासों की भी बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने निम्नलिखित तकनीकी क्षेत्रों में कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
ऑटोनॉमस सिस्टम्स (Autonomous Systems)
डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics)
साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क
इसके अलावा, इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में अनुकरणीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के उन जवानों को भी सम्मानित किया, जो संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों (UN Peacekeepers) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह सम्मान उनके उच्च पेशेवर रवैये और उत्कृष्ट सेवा भावना को समर्पित था।
जमीनी सेना की अहमियत हमेशा रहेगी बरकरार
हवा, समुद्र और साइबर स्पेस जैसी आधुनिक सीमाओं पर भले ही चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हों, लेकिन रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्ध के किसी भी दौर में थल युद्ध (Land Warfare) और जमीनी सैनिकों की प्रासंगिकता और अहमियत हमेशा सर्वोच्च बनी रहेगी।