Arunachal Pradesh Border: माजा के पास आमने-सामने आए भारत और चीन के सैनिक, ITBP बना रही अंडरग्राउंड शेल्टर
Arunachal Pradesh Border: भारत-चीन सीमा पर कई स्थानों पर सैनिकों के आमने-सामने होने की खबर है। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने सीमा पर बनी संवेदनशील स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि जवानों की निगरानी और सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए ड्रोन प्लाटून, एंटी-ड्रोन सिस्टम और भूमिगत शेल्टर जैसी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है।
Arunachal Pradesh Border: अलवर भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति और तनाव कम होने की तमाम आधिकारिक चर्चाओं के बीच अरुणाचल प्रदेश के सरहदी इलाकों से चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर भारत और चीन के
सैनिक एक-दूसरे के सामने आ डटे हैं। इस संवेदनशील स्थिति की पुष्टि खुद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने की है। राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए ITBP चीफ ने साफ किया कि अरुणाचल सीमा पर किसी एक जगह नहीं, बल्कि कई अलग-अलग स्थानों पर चीनी सेना के साथ आमना-सामना (फेस-ऑफ) की स्थिति बनी हुई है।
तक्सिंग और माजा क्षेत्र में सबसे ज़्यादा हलचल
ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, सबसे ज़्यादा तनाव अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में स्थित तवांग से अलग 'तक्सिंग' इलाके के पास देखा जा रहा है। जुलाई के आखिरी हफ्ते में माजा क्षेत्र के पास भारतीय और चीनी गश्ती दल का आमना-सामना हो गया था, जिसके बाद से उस इलाके में गतिरोध बना हुआ है। स्थानीय और रक्षा सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि चीनी पक्ष ने इस इलाके में अस्थायी टेंट लगाए हैं, हालांकि सेना या सरकार की ओर से टेंट लगाए जाने के दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
क्यों बार-बार बनता है टकराव?
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक
सीमा का बड़ा हिस्सा स्पष्ट रूप से सीमांकित (Demarcated) नहीं है। दोनों देश LAC को लेकर अपने-अपने दावे पेश करते हैं। ऐसे में जब दोनों ही पक्षों की गश्ती टीमें अपनी-अपनी दावा रेखा (Claim Line) तक पेट्रोलिंग करती हैं, तो अक्सर उनका सामना एक-दूसरे से हो जाता है।
ITBP तैयार कर रही ड्रोन प्लाटून और अंडरग्राउंड शेल्टर
चीनी सेना की बढ़ती मौजूदगी और अत्याधुनिक सैन्य संसाधनों को देखते हुए भारत ने भी अपनी रक्षा रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं। DG शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि अब सीमा की सुरक्षा सिर्फ पारंपरिक गश्त या पुरानी तकनीकों के भरोसे नहीं की जा सकती। चीन के आधुनिक हथियारों और नई तकनीक का जवाब देने के लिए ITBP अपनी क्षमताओं को तेज़ी से अपग्रेड कर रही है:
भूमिगत शेल्टर (Underground Bunkers): एलएसी के बेहद करीब अपने जवानों और रक्षा संसाधनों को दुश्मन की नज़रों तथा खराब मौसम से बचाने के लिए ITBP बड़े पैमाने पर भूमिगत शेल्टरों का निर्माण कर रही है।
ड्रोन प्लाटून की तैनाती: हर सीमा सुरक्षा बटालियन में अब एक समर्पित 'ड्रोन प्लाटून' का गठन किया गया है। जवानों को ड्रोन उड़ाने और निगरानी करने की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
एंटी-ड्रोन तकनीक: दुश्मन देश के ड्रोनों को सीमा में घुसने से रोकने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम भी विकसित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान ITBP प्रमुख ने शौर्य कमांडो टीमों के साहस की विशेष सराहना की, जिन्होंने इस दुर्गम और तनावपूर्ण माहौल में सीमाओं की डटकर सुरक्षा की है।
बैठकों का दौर जारी, फिर भी क्यों नहीं पिघल रही बर्फ?
चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताते हुए लगातार उकसावे वाली हरकतें करता रहा है। हाल ही में उसने भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलने की नाकाम कोशिश की थी, जिस पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया था। भारत ने हर मंच पर यह स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और रहेगा। हैरानी की बात यह है कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत चल रही है। हाल ही में सितंबर महीने में अरुणाचल प्रदेश के 'वाचा-दमाई' बॉर्डर मीट पॉइंट पर दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच उच्च स्तरीय बैठक भी हुई थी। इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर चीन के अड़ियल रवैये के कारण तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।