Anduril Military Contract: आधुनिक युद्धक्षेत्र में त्वरित निर्णय लेने और विभिन्न हथियारों व प्रणालियों को एक ही नेटवर्क पर लाने के उद्देश्य से अमेरिकी सेना ने एक बड़ा कदम उठाया है। सेना ने रक्षा तकनीक कंपनी 'एंडुरिल इंडस्ट्रीज' (Anduril Industries) के साथ एक ऐतिहासिक करार किया है। 30 सितंबर को घोषित किए गए इस अनुबंध की कुल कीमत अगले पांच वर्षों में 1.8 अरब डॉलर (लगभग 15,000 करोड़ रूपए) तक पहुंच सकती है। इस डील के तहत एंडुरिल अमेरिकी सेना के नए बैटलफील्ड सॉफ्टवेयर को प्रयोग के दौर से निकालकर सीधे मोर्चे पर तैनात करने में मदद करेगी।
क्या है नेक्स्ट जेनरेशन कमांड एंड कंट्रोल (NGC2) ?
अमेरिकी सेना की पुरानी पीढ़ी की कमांड-एंड-कंट्रोल प्रणालियों (जो गोलाबारी, रसद और हवाई क्षेत्र को नियंत्रित करती थीं) को हटाकर अब 'NGC2' (Next Generation Command and Control) प्रणाली को लागू किया जा रहा है। NGC2 एक ऐसी तकनीक है जो सेना के सभी हथियारों, सेंसरों, टोही उपकरणों, वाहनों और सॉफ्टवेयर ऐप्स को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि युद्ध के मैदान में अधिकारियों को सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे त्वरित और प्रभावी निर्णय लिए जा सकेंगे।
इंडो-पैसिफिक रीजन में पहला बड़ा इम्तिहान
सेना ने एंडुरिल को एनजीसी2 के 'कॉमन डेटा बेसलाइन' (सॉफ्टवेयर फाउंडेशन) पर काम जारी रखने के लिए तुरंत 162.8 मिलियन डॉलर दिए हैं। इस तकनीक को सबसे पहले हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में तैनात 'आई कोर' (I Corps) में लागू किया जा रहा है। इंडो-पैसिफिक का इलाका हजारों मील में फैला है, जहां इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी अक्सर बाधित या खराब रहती है। ऐसे कठिन माहौल में विभिन्न प्रणालियों के बीच डेटा और सूचना का प्रवाह सुचारू रूप से बनाए रखना इस सॉफ्टवेयर के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।कैसे काम करता है एंडुरिल का 'लैटिस' ऑपरेटिंग सिस्टम ?
एंडुरिल ने अपने एआई-संचालित (AI-driven) 'लैटिस' (Lattice) ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर इस प्रोजेक्ट का खाका तैयार किया है। कंपनी के अनुसार, एक सामान्य डेटा लेयर होने से सेना को हर नए हथियार, ड्रोन या सेंसर के लिए अलग से सॉफ्टवेयर नहीं बनाना पड़ेगा। किसी भी नई तकनीक को मौजूदा सिस्टम में आसानी से जोड़ा (इंटीग्रेट किया) जा सकेगा। इस बेसलाइन को तैयार करने में एंडुरिल के साथ पैलेंटिर (Palantir), राफ्ट (Raft) और स्ट्राइववर्क्स (Striveworks) जैसी प्रमुख टेक कंपनियों ने भी भागीदारी की है।
कठिन परिस्थितियों और साइबर हमलों के बीच हुआ परीक्षण
- जुलाई 2026 (प्रोजेक्ट कन्वर्जेंस-कैपस्टोन 6): कैलिफोर्निया के फोर्ट इरविन में 10 दिनों तक चले इस मेगा ट्रायल में अमेरिका और सहयोगी देशों के 10,000 सैनिकों तथा 90 नई तकनीकों के साथ एनजीसी2 के सॉफ्टवेयर का परीक्षण किया गया।
- मई 2026 (साइबर हमले का सामना): फोर्ट कार्सन और पिनोन कैन्यन में एंडुरिल ने 160 से अधिक सामरिक कंप्यूटरों, 2,500 से अधिक उपकरणों और 40 ऐप्स को एक साथ तैनात किया। इस दौरान सिस्टम पर नकली साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हमले कराए गए, जिनमें यह तकनीक खरी उतरी।
धीमी गति ही सबसे बड़ा खतरा:
पूर्व सेना सचिव पूर्व अमेरिकी सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने इस तकनीक की जरूरत पर बल देते हुए कहा, हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा काम करने की धीमी गति है। आज के दौर में युद्ध वही जीतता है जो सबसे तेजी से डेटा प्रोसेस करके त्वरित कार्रवाई करता है। एनजीसी2 प्रणाली हमारी सेना को वही निर्णायक बढ़त प्रदान करेगी।







