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Palantir US Army contract ( Image Source - AI Generated )
Palantir US Army contract ( Image Source - AI Generated )
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Palantir Army Contract: अमेरिकी सेना का बड़ा कदम, पैलेंटिर को मिला 48.1 मिलियन डॉलर का ठेका

Palantir Army Contract: अमेरिकी सेना ने गोला-बारूद प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए पैलेंटिर को 48.1 मिलियन डॉलर का ठेका दिया है। नए सॉफ्टवेयर से नौ पुरानी प्रणालियों को एकीकृत कर ट्रैकिंग, योजना और निगरानी को बेहतर किया जाएगा।

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प्रकाशित: 25 Sep 2026, 03:00 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
अमेरिका
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Palantir Army Contract: अमेरिकी सेना ने अपने गोला-बारूद प्रबंधन और ट्रैकिंग तंत्र को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए सेना ने पैलेंटिर टेक्नोलॉजीज की एक सहायक कंपनी के साथ 48.1 मिलियन डॉलर (लगभग 400 करोड़ रूपए) का समझौता किया है। इस अनुबंध के तहत पैलेंटिर एक ऐसा उन्नत सॉफ्टवेयर तैयार करेगी, जो नौ अलग-अलग पुरानी और असंबद्ध प्रणालियों (Legacy Systems) को हटाकर उन्हें एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले आएगा।

पुरानी प्रणालियों से छुटकारा और बेहतर पारदर्शिता 

सेना द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह नया प्रोजेक्ट लॉजिस्टिक्स आधुनिकीकरण और ऑडिटिंग (लेखापरीक्षा) की तैयारियों को मजबूत करने का एक अहम हिस्सा है। इस सॉफ्टवेयर में 'कमर्शियल लो-कोड, नो-कोड' तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सैनिक गोला-बारूद के पूरे जीवनचक्र (Lifecycle) पर आसानी से नजर रख सकेंगे। अब गोला-बारूद की योजना, उत्पादन, खरीद, भंडारण और वितरण से लेकर उसके इस्तेमाल और अंतिम निपटान तक की पूरी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी।

क्यों पड़ी इस नए सिस्टम की जरूरत ? 
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सेना लंबे समय से गोला-बारूद प्रबंधन में आ रही कमियों से जूझ रही थी। मार्च में सेना की पत्रिका 'लाइन ऑफ डिपार्चर' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया था कि मौजूदा सिस्टम में कई खामियां हैं: सटीक अनुमान का अभाव: निचले स्तरों पर गोला-बारूद की मांग का आकलन वास्तविक ट्रेनिंग चक्रों के बजाय सिर्फ पुराने आंकड़ों और अनुमानों पर आधारित होता था। रियल-टाइम अपडेट न होना: पुरानी प्रणालियां एक-दूसरे से जुड़ी नहीं थीं। अगर प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोई अचानक बदलाव होता, तो उसकी जानकारी लॉजिस्टिक्स सिस्टम में तुरंत अपडेट नहीं हो पाती थी। परिचालन में देरी: रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि पुराना जवाबदेही मॉडल आधुनिक सेना की परिचालन गति और डिजिटल जरूरतों के हिसाब से काफी पीछे छूट चुका था।

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद मिला ठेका 

सेना के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए छह सप्ताह तक चली तीन-चरणीय चयन प्रक्रिया के बाद पैलेंटिर को चुना गया। कंपनी ने इस दौड़ में कई अन्य प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ा। मूल्यांकन के दौरान पैलेंटिर की डेटा इंटीग्रेशन क्षमता, सटीक पूर्वानुमान मॉडल और कम बैंडविड्थ या बिना इंटरनेट वाले कठिन सामरिक (tactical) इलाकों में भी काम करने की क्षमता को मुख्य आधार बनाया गया। 

6 साल का रहेगा करार 

अनुबंध की शर्तों के मुताबिक, पैलेंटिर अगले 12 महीनों के भीतर यह नया सॉफ्टवेयर विकसित करेगी। इसके बाद कंपनी अगले 5 सालों तक इसके संचालन और तकनीकी सहायता की जिम्मेदारी भी संभालेगी। गौरतलब है कि पैलेंटिर इससे पहले भी अमेरिकी रक्षा क्षेत्र में आर्मी वैंटेज, नेक्स्ट जेनरेशन कमांड एंड कंट्रोल और 'मेवेन स्मार्ट सिस्टम' (MSS) जैसे कई एआई-संचालित (AI-enabled) प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी है।
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