India Russia Defence Deal: वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। चीन और पाकिस्तान के बीच संभावित पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट समझौतों की सुगबुगाहट के बीच रूस ने भारत को एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जो भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है। इस नई पेशकश के तहत रूस ने भारत को 140 आधुनिक Su-57E पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों की खरीद और देश में ही इनके निर्माण का बड़ा ऑफर दिया है।
क्या है रूस का यह नया प्रस्ताव ?
रूस चाहता है कि भारत उसके सबसे उन्नत पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57E को अपने बेड़े में शामिल करे। इस डील की रूपरेखा कुछ इस तरह तैयार की गई है:
- शुरुआती आपूर्ति और बड़ा ऑर्डर: रूस के प्रस्ताव के मुताबिक, भारत सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत पहले चरण में तैयार हालत में 40 सिंगल-सीटर Su-57E विमान खरीद सकता है। इसके बाद, स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए 100 और विमानों का ऑर्डर देने पर विचार किया जा सकता है।
- मेक इन इंडिया और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: इस डील का सबसे अहम पहलू यह है कि रूस भारत को 60 प्रतिशत से अधिक तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी उत्पादन की पेशकश कर रहा है।
- एचएएल (HAL) नासिक प्लांट का इस्तेमाल: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक प्लांट में मौजूदा Su-30MKI की उत्पादन लाइन पूरी होने के बाद, उसका उपयोग Su-57E के निर्माण के लिए किए जाने की योजना है। हालांकि, इस नए प्लांट को तैयार करने के लिए करीब 50 से 60 प्रतिशत नए टूलिंग उपकरणों की जरूरत होगी।
दो सीटों वाले वेरिएंट और इंजन पर भी चर्चा
भारतीय वायुसेना की पारंपरिक जरूरतों और आधुनिक युद्धक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट में कुछ खास बदलावों पर भी बात चल रही है:
- रूस ने Su-57 के दो सीटों वाले संस्करण (Two-seater variant) का परीक्षण भी शुरू कर दिया है। Su-30MKI की तरह इसमें दूसरा क्रू मेंबर हथियार संचालन के साथ-साथ भविष्य के ड्रोन कॉम्बैट और कमांड को संभालने में मददगार साबित हो सकता है।
- इस प्रस्ताव में इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का विकल्प भी शामिल है, जिसका उपयोग भविष्य में Su-30MKI बेड़े के अपग्रेडेशन और उनके AL-31F इंजन को बदलने के लिए किया जा सकता है।
- इसके अलावा, रूस विमान के मिशन कंप्यूटर और रडार का सोर्स कोड देने को भी तैयार है, जिससे भारत अपनी जरूरत के मुताबिक स्वदेशी हथियारों को इस विमान में आसानी से इंटीग्रेट कर सकेगा।







