Germany Frigate Deal: जर्मन नौसेना की ताकत में जल्द ही बड़ा इजाफा होने जा रहा है। देश के सांसदों ने जहाज निर्माता कंपनी 'टीकेएमएस' (TKMS) से चार और नए 'मेको ए-200 डीईयू' (MEKO A-200 DEU) फ्रिगेट जहाजों की खरीद को अपनी मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब बर्लिन के बेड़े में शामिल होने वाले इन अत्याधुनिक फ्रिगेट्स की कुल संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी। सरकार का यह कदम उसके पुराने और विवादों में घिरे एफ-126 (F126) प्रोजेक्ट को पूरी तरह रद्द करने के बाद सामने आया है।
एक ही क्लास के जहाजों पर भरोसा
इससे पहले 8 जुलाई को बुंडेस्टैग (जर्मन संसद) की बजट समिति ने शुरुआती चार फ्रिगेट जहाजों की खरीद और चार अन्य जहाजों के विकल्प को मंजूरी दी थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस विकल्प का इस्तेमाल करने से नौसेना को एक ही श्रेणी के आठ जहाजों का एक मजबूत बेड़ा मिलेगा, जिन्हें खासतौर पर पनडुब्बी-रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है। बयान के मुताबिक, पहले फ्रिगेट की डिलीवरी 2029 में होने की उम्मीद है। ये जहाज बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, अटलांटिक महासागर और सुदूर उत्तरी क्षेत्रों में नाटो (NATO) के रणनीतिक मिशनों में तैनात किए जाएंगे।
पुराने प्रोजेक्ट से पीछे हटने की वजह
जर्मनी ने पहले 'डेमेन नेवल' (Damen Naval) के साथ छह F126 फ्रिगेट्स का समझौता किया था, जिन्हें बेड़े की पनडुब्बी-रोधी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए तैयार किया जाना था। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने डेमेन द्वारा "काम की गुणवत्ता और समयसीमा (प्रदर्शन) से जुड़ी गंभीर समस्याओं" का हवाला देते हुए इस कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया। इस फैसले ने एक बड़े वित्तीय विवाद को जन्म दे दिया है। जर्मन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, डेमेन ने सरकार के इस कदम को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए 4.7 अरब यूरो (लगभग 5.3 अरब डॉलर) के हर्जाने का दावा किया है। वहीं, सार्वजनिक प्रसारक ARD के अनुसार, F126 प्रोजेक्ट पर जर्मनी पहले ही 2 अरब यूरो से ज्यादा पानी की तरह बहा चुका है, जबकि उसे बदले में एक भी जहाज नहीं मिला।लागत और रखरखाव का गणित
नए MEKO प्रोजेक्ट के बजट की बात करें तो शुरुआती चार जहाजों की कीमत करीब 6.3 अरब यूरो आंकी गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाकी चार जहाजों के इस दूसरे चरण की लागत (प्रोजेक्ट सपोर्ट और स्पेयर पार्ट्स मिलाकर) लगभग 5.6 अरब यूरो होगी। इसके अलावा, 2045 तक इन चार नए जहाजों के संचालन और रखरखाव पर करीब 1.55 अरब यूरो का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि अलग-अलग मॉडलों के बजाय एक ही तरह के आठ फ्रिगेट्स रखने से सैनिकों के प्रशिक्षण, रखरखाव और लॉजिस्टिक्स को संभालने में काफी आसानी होगी। वैसे भी MEKO A-200 के अलग-अलग वेरिएंट्स पहले से ही कई मित्र देशों की नौसेनाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
