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P-75I AIP submarine project ( Image Source - AI Generated )
P-75I AIP submarine project ( Image Source - AI Generated )
रक्षा

India Submarine Deal: जर्मनी के साथ 70 हजार करोड़ की सबमरीन डील, नेवी को मिलेंगी 6 एडवांस AIP पनडुब्बियां

India Submarine Deal: भारत और जर्मनी के बीच करीब ₹70 हजार करोड़ की P-75I AIP Submarine Deal को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। जर्मनी ने इस रक्षा परियोजना से जुड़ी अपनी आंतरिक प्रक्रिया पूरी कर ली है।

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प्रकाशित: 27 Sep 2026, 05:17 PM · 2 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
India Submarine Deal: भारत अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसी कड़ी में भारत और जर्मनी के बीच प्रस्तावित P-75I AIP सबमरीन प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। करीब 8 अरब डॉलर यानी लगभग 70 हजार करोड़ रूपए की इस रक्षा परियोजना के लिए जर्मनी ने अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली है।

P-75I प्रोजेक्ट क्यों है महत्वपूर्ण ? 

भारतीय नौसेना के लिए प्रोजेक्ट-75I को पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह परियोजना पहले के प्रोजेक्ट-75 का विस्तार है, जिसके तहत फ्रांस के सहयोग से छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण किया गया था। इन पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना में कलवरी क्लास के नाम से शामिल किया गया है। नई P-75I पनडुब्बियां जर्मनी की HDW Class-214 तकनीक पर आधारित होंगी। इनकी सबसे बड़ी खासियत एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगी। 

AIP तकनीक से बढ़ेगी पनडुब्बियों की क्षमता 
आम डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह के करीब आना पड़ता है। इस दौरान उनके दुश्मन की निगरानी में आने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं। इससे उनकी गुप्त रूप से ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ती है और समुद्री मिशनों में उनकी प्रभावशीलता बेहतर होती है। प्रस्तावित P-75I पनडुब्बियों के बारे में माना जा रहा है कि वे कई हफ्तों तक पानी के भीतर संचालन करने में सक्षम होंगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी और रणनीतिक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत का फोकस आधुनिक रक्षा तकनीक पर 

भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी विकास और अत्याधुनिक तकनीकों पर तेजी से ध्यान दे रहा है। फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम, युद्धपोत और पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने के साथ देश अपनी समुद्री सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है। P-75I प्रोजेक्ट को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीक के साथ भारत में रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
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