India Submarine Deal: भारत अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसी कड़ी में भारत और जर्मनी के बीच प्रस्तावित P-75I AIP सबमरीन प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। करीब 8 अरब डॉलर यानी लगभग 70 हजार करोड़ रूपए की इस रक्षा परियोजना के लिए जर्मनी ने अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली है।
P-75I प्रोजेक्ट क्यों है महत्वपूर्ण ?
भारतीय नौसेना के लिए प्रोजेक्ट-75I को पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह परियोजना पहले के प्रोजेक्ट-75 का विस्तार है, जिसके तहत फ्रांस के सहयोग से छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण किया गया था। इन पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना में कलवरी क्लास के नाम से शामिल किया गया है। नई P-75I पनडुब्बियां जर्मनी की HDW Class-214 तकनीक पर आधारित होंगी। इनकी सबसे बड़ी खासियत एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगी।
AIP तकनीक से बढ़ेगी पनडुब्बियों की क्षमता
आम डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह के करीब आना पड़ता है। इस दौरान उनके दुश्मन की निगरानी में आने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं। इससे उनकी गुप्त रूप से ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ती है और समुद्री मिशनों में उनकी प्रभावशीलता बेहतर होती है। प्रस्तावित P-75I पनडुब्बियों के बारे में माना जा रहा है कि वे कई हफ्तों तक पानी के भीतर संचालन करने में सक्षम होंगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी और रणनीतिक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आम डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह के करीब आना पड़ता है। इस दौरान उनके दुश्मन की निगरानी में आने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं। इससे उनकी गुप्त रूप से ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ती है और समुद्री मिशनों में उनकी प्रभावशीलता बेहतर होती है। प्रस्तावित P-75I पनडुब्बियों के बारे में माना जा रहा है कि वे कई हफ्तों तक पानी के भीतर संचालन करने में सक्षम होंगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी और रणनीतिक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

