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German Eurofighter jets in Latvia ( Image Source - AI Generated )
German Eurofighter jets in Latvia ( Image Source - AI Generated )
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Latvia Drone Threat: जर्मनी भेजेगा चार यूरोफाइटर, चुनाव के दौरान होगी कड़ी निगरानी

Latvia Drone Threat: जर्मनी लातविया में आगामी संसदीय चुनाव के दौरान हवाई सुरक्षा के लिए चार यूरोफाइटर जेट और सैन्य दल भेजेगा। रूस-बेलारूस की ओर से ड्रोन घुसपैठ की चिंताओं के बीच यह तैनाती करीब एक सप्ताह की होगी।

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प्रकाशित: 18 Sep 2026, 03:08 PM · अपडेट: 29 Oct 2026, 02:46 PM
जर्मनी
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Latvia Drone Threat: जर्मनी लातविया में होने वाले आगामी संसदीय चुनाव के दौरान हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए चार यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमान भेजेगा। रूस और बेलारूस की दिशा से ड्रोन के अनधिकृत प्रवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच यह तैनाती की जा रही है। जर्मन रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चार यूरोफाइटर के साथ कई दर्जन सैनिक और तकनीकी कर्मचारी मध्य लातविया स्थित लिलवार्डे एयरबेस पर तैनात किए जाएंगे। यह दल सितंबर के अंत से अक्टूबर की शुरुआत तक करीब एक सप्ताह वहां रहेगा।

3 अक्टूबर को होना है लातविया में चुनाव 

लातवियाई अधिकारियों ने आम चुनाव के दौरान देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों से सहायता मांगी थी। लातविया में संसदीय चुनाव 3 अक्टूबर को प्रस्तावित हैं। जर्मनी की यह तैनाती इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। यह मिशन बाल्टिक क्षेत्र में नाटो की एयर पुलिसिंग व्यवस्था से जुड़ा है। हालांकि, इसकी अवधि करीब एक सप्ताह रखी गई है और इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव के दौरान हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए यह नाटो के सामान्य चार महीने के एयर पुलिसिंग रोटेशन से अलग है। 

बाल्टिक देशों में बढ़ी ड्रोन को लेकर चिंता 

लातविया, एस्टोनिया और लिथुआनिया के पास अपने लड़ाकू विमान नहीं हैं। इन देशों के हवाई क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा में नाटो के सहयोगी देशों के विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लातविया में आमतौर पर नाटो के लड़ाकू विमानों की स्थायी तैनाती नहीं रहती। जरूरत के अनुसार पड़ोसी देशों में तैनात सहयोगी विमानों को लातवियाई हवाई क्षेत्र की निगरानी के लिए भेजा जाता है। पिछले कुछ समय में बाल्टिक देशों में ड्रोन के अनधिकृत प्रवेश की घटनाओं ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं। 

लिथुआनिया में ड्रोन मार गिराए जाने के बाद बढ़ा ध्यान

इसी सप्ताह पड़ोसी लिथुआनिया में नाटो के इतालवी लड़ाकू विमानों ने बेलारूस की ओर से सीमा पार कर आए एक संदिग्ध रूसी निर्मित ड्रोन को मार गिराया। लिथुआनियाई अधिकारियों के अनुसार, देश के हवाई क्षेत्र में किसी ड्रोन को मार गिराने की यह पहली घटना थी। इस घटनाक्रम के बाद बाल्टिक क्षेत्र में हवाई निगरानी और सुरक्षा को लेकर चर्चा और तेज हुई है। 

लिलवार्डे एयरबेस पर पहले भी पहुंचे नाटो के विमान 

लातविया का लिलवार्डे एयरबेस नाटो के लिए नया नहीं है। यहां समय-समय पर अलग-अलग सहयोगी देशों के लड़ाकू विमानों की तैनाती और यात्राएं होती रही हैं। अगस्त के अंत में तुर्की के दो एफ-16 लड़ाकू विमानों ने भी इस एयरबेस का दौरा किया था। इससे पहले अप्रैल में लिथुआनिया के शियाउलियाई एयरबेस से संचालित फ्रांसीसी राफेल विमानों ने लिलवार्डे का दौरा किया था। नाटो अपने रूसी सीमा से जुड़े अभियानों के दौरान एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमानों के संचालन के लिए भी इस एयरबेस का इस्तेमाल करता रहा है।

2004 से नाटो का हिस्सा हैं तीनों बाल्टिक देश 

लातविया, एस्टोनिया और लिथुआनिया वर्ष 2004 में नाटो के सदस्य बने थे। इन तीनों देशों के लिए गठबंधन की पूर्वी सीमा की सुरक्षा एक अहम मुद्दा बनी हुई है। रूस के साथ भौगोलिक निकटता और हाल की ड्रोन घटनाओं के कारण क्षेत्र में हवाई निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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