AMCA Mk2 Engine: 120 KN इंजन पर भारत की नजर सैफरान और रोल्स-रॉयस के बीच कड़ा मुकाबला
AMCA Mk2 Engine: 120 केएन इंजन के लिए भारत सैफरान और रोल्स-रॉयस के प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। तकनीकी हस्तांतरण, बौद्धिक संपदा और घरेलू निर्माण क्षमता इस फैसले के प्रमुख आधार हैं। इंजन साझेदार का चयन भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और भविष्य की एयरोस्पेस तकनीक के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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कीर्तिमान डेस्क | कमलेश साहू
07 Sep 2026, 04:42 PM
भारत
AMCA Mk2 Engine: भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए 120 किलो न्यूटन (केएन) थ्रस्ट इंजन का चयन अब अहम मोड़ पर पहुंच गया है। उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) एमके2 के सह-विकास के लिए फ्रांस की सैफरान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस दावेदार हैं। दोनों कंपनियों के प्रस्तावों में तकनीक, बौद्धिक संपदा और भारत में निर्माण क्षमता से जुड़े बड़े वादे शामिल हैं।
सिर्फ इंजन नहीं, भविष्य की रक्षा तकनीक का सवाल
इस साझेदारी का महत्व केवल एक शक्तिशाली इंजन तैयार करने तक सीमित नहीं है। भारत के लिए यह फैसला आने वाले वर्षों में विमान निर्माण, इंजन तकनीक और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा भी तय कर सकता है। सरकार चाहती है कि इस परियोजना से देश को अत्याधुनिक तकनीक मिले और भविष्य में विदेशी निर्भरता कम हो। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित संयुक्त उद्यम में करीब 61,000 करोड़ रूपए (लगभग 7 अरब डॉलर) के निवेश की बात सामने आई है। भारत बौद्धिक संपदा पर मजबूत अधिकार और व्यापक तकनीकी हस्तांतरण चाहता है।
रोल्स-रॉयस का नया डिजाइन और औद्योगिक साझेदारी AMCA Mk2 Engine
रोल्स-रॉयस ने कथित तौर पर एक नए इंजन डिजाइन के विकास और भारत को व्यापक बौद्धिक संपदा अधिकार देने का प्रस्ताव रखा है। कंपनी ने अपनी तकनीकी क्षमताओं के साथ भारत में एयरोस्पेस गैस टर्बाइन निर्माण का ढांचा विकसित करने की संभावना पर भी जोर दिया है। ब्रिटिश कंपनी की ओर से रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख भी इस चर्चा में सामने आया है। यदि ऐसे प्रस्ताव आगे बढ़ते हैं, तो भारतीय इंजीनियरों और निजी क्षेत्र को उन्नत इंजन तकनीक, डिजाइन और विनिर्माण प्रक्रियाओं से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
सैफरान का दावा: सिद्ध तकनीक और तेज विकास
सैफरान का प्रस्ताव अपने मौजूदा एम88 इंजन आर्किटेक्चर के अनुभव पर आधारित बताया जा रहा है। कंपनी पहले से भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में सक्रिय है, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं और औद्योगिक ढांचे की समझ उसके पक्ष में जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, सैफरान ने व्यापक तकनीकी हस्तांतरण और निर्यात पर प्रतिबंध न होने का आश्वासन दिया है। उसके प्रस्ताव में रोल्स-रॉयस की शुरुआती समय-सीमा की तुलना में करीब दस साल तेज विकास चक्र का दावा भी शामिल है।
रणनीतिक विविधता पर भी नजर
भारत के फ्रांस के साथ पहले से मजबूत रक्षा संबंध हैं, जिनमें राफेल लड़ाकू विमान कार्यक्रम प्रमुख है। इसके बावजूद, किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर रणनीतिक चिंताएं बनी रहती हैं। रक्षा क्षेत्र में सहयोगी देशों की नीतियों, निर्यात नियंत्रण और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव का असर लंबे समय तक पड़ सकता है। ऐसे में ब्रिटेन को एएमसीए जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल करना भारत के लिए रणनीतिक विविधता बढ़ाने का एक विकल्प माना जा रहा है।
प्रतिस्पर्धा से भारत की सौदेबाजी मजबूत
सैफरान और रोल्स-रॉयस के बीच मुकाबले का एक बड़ा फायदा यह है कि भारत के पास बेहतर शर्तों पर बातचीत करने का अवसर है। दोनों कंपनियों के प्रस्तावों में तकनीकी हस्तांतरण, बौद्धिक संपदा और घरेलू औद्योगिक भागीदारी जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। यदि प्रतिस्पर्धा के कारण भारत को अधिक अधिकार, बेहतर तकनीकी सहयोग और मजबूत विनिर्माण आधार मिलता है, तो यह एएमसीए कार्यक्रम के साथ-साथ देश के व्यापक एयरोस्पेस उद्योग के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
एमके1 से एमके2 तक चरणबद्ध विकास
एएमसीए कार्यक्रम को चरणों में आगे बढ़ाने की योजना इस इंजन निर्णय के लिए समय का अवसर देती है। शुरुआती एमके1 प्रोटोटाइप के लिए अमेरिकी जनरल इलेक्ट्रिक के एफ 414 इंजन का उपयोग प्रस्तावित है। इससे एमके2 के लिए नए इंजन के विकास के दौरान उड़ान परीक्षण और कार्यक्रम की शुरुआती प्रगति जारी रखने में मदद मिल सकती है। उच्च थ्रस्ट वाले एमके2 इंजन की जरूरत 2030 के दशक में होने की उम्मीद है। रिपोर्टों में रोल्स-रॉयस की ओर से 2030 तक मुख्य परीक्षण शुरू करने की पेशकश का भी उल्लेख है। हालांकि, अंतिम समय-सीमा और विकास की गति चयनित साझेदार तथा परियोजना की प्रगति पर निर्भर करेगी।