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Thales 70mm rockets made in India (Image Source - Social Media)
Thales 70mm rockets made in India (Image Source - Social Media)
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Indian Defense Production: अब भारत में बनेंगे बेल्जियम के 70-मिमी रॉकेट, रक्षा उत्पादन को मिलेगी मजबूती

Indian Defense Production: थेल्स और KSSL भारत में 70-मिमी रॉकेट बनाएंगे। पहला स्वदेशी रॉकेट 2027 की शुरुआत तक आने की उम्मीद है। यह साझेदारी भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने, रक्षा उत्पादन में की दिशा में अहम कदम है।

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प्रकाशित: 05 Sep 2026, 04:44 PM · अपडेट: 20 Oct 2026, 05:48 PM
भारत
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Indian Defense Production: भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने और सैन्य सामानों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। फ्रांस और बेल्जियम की जानी-मानी रक्षा कंपनी 'थेल्स' (Thales) ने भारत की 'कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड' (KSSL) के साथ हाथ मिलाया है। इस करार के तहत अब 70-मिमी के नॉन-गाइडेड और लेजर-गाइडेड रॉकेटों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण समझौता बेल्जियम के प्रधानमंत्री की हालिया भारत यात्रा के दौरान हुआ है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक और सैन्य संबंधों को दर्शाता है।

2027 तक आएगा पहला 'मेड इन इंडिया' रॉकेट 

साझेदारी के तहत थेल्स अपनी बेल्जियम इकाई की अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता साझा करेगी, जबकि कल्याणी ग्रुप अपनी मैन्युफैक्चरिंग और टेस्ट फैसिलिटी का इस्तेमाल करके इनका उत्पादन करेगा। योजना के मुताबिक, पूरी तरह से भारत में तैयार पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत तक बनकर तैयार हो जाएगा। 

सेना के लिए क्यों खास है यह रॉकेट सिस्टम ? 
Thales 70mm rocket

थेल्स की 70-मिमी रॉकेट प्रणाली कोई नई नहीं है, यह पहले से ही भारतीय सेना के बेड़े का हिस्सा रही है। इसे भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH 'प्रचंड') और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH 'ध्रुव') पर आसानी से तैनात किया जा सकता है। इन रॉकेटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें हवा, जमीन और समंदर तीनों जगहों से दागा जा सकता है। मौजूदा वक्त में ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए, इनका इस्तेमाल दुश्मन के ड्रोनों को हवा में ही ढेर करने के लिए भी किया जा सकेगा। इससे भारतीय वायुसेना और थलसेना की हवाई हमले की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

'आत्मनिर्भर भारत' और निर्यात के खुलेंगे रास्ते 

भारत इस समय दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य बजट वाला देश है और हथियारों के आयात के मामले में भी शीर्ष देशों में शामिल है। सरकार की कोशिश है कि इस निर्भरता को खत्म कर देश में ही आधुनिक हथियार बनाए जाएं। इस करार का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ये रॉकेट न सिर्फ भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि इनका दूसरे देशों में निर्यात भी किया जा सकेगा। थेल्स का यह रॉकेट सिस्टम दुनिया भर के 55 से ज्यादा देशों की सेनाएं इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसे में भारत में बनने वाले इन रॉकेटों के लिए वैश्विक बाजार पहले से ही तैयार है। इससे देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा मिलेगी और भारतीय रक्षा उद्योग को दुनिया भर में एक नई पहचान हासिल होगी। थेल्स इंडिया के उपाध्यक्ष अंकुर कनागलेकर के अनुसार, बेल्जियम की इस परखी हुई रॉकेट तकनीक और भारत की मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता के मिलने से सेना की युद्ध तैयारियों को काफी मजबूती मिलेगी।
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