Defence Technology: अब सैनिकों की आवाज पर चलेंगे ड्रोन ,ऑस्ट्रेलिया ने विकसित की नई वॉयस-कमांड तकनीक
Defence Technology: ऑस्ट्रेलिया के Boxer 8x8 बख्तरबंद वाहन में Avalon तकनीक से सैनिक आवाज के जरिए ड्रोन नियंत्रित कर सकेंगे। Rheinmetall और Breaker Industries इस सिस्टम को विकसित कर रही हैं, जिसका परीक्षण 2027 में प्रस्तावित है।
प्रकाशित: 16 Oct 2026, 04:52 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
ऑस्ट्रेलिया
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Defence Technology: युद्ध के मैदान में बख्तरबंद गाड़ियों में तैनात सैनिकों का काम जल्द ही आसान होने वाला है। ऑस्ट्रेलिया की एक नई तकनीक के जरिए अब सैनिक महज अपनी आवाज से ही जमीन और हवा में तैनात ड्रोनों को निर्देश दे सकेंगे। इसके लिए सिडनी स्थित एक स्टार्टअप 'ब्रेकर इंडस्ट्रीज' (Breaker Industries) और 'राइनमेटल डिफेंस ऑस्ट्रेलिया' साथ मिलकर एक खास सॉफ्टवेयर 'एवलॉन ह्यूमन-मशीन इंटरफेस' (Avalon Human-Machine Interface) विकसित कर रहे हैं।
लैंड फोर्सेज 2026 में हुआ समझौता
पर्थ में आयोजित 'लैंड फोर्सेज 2026' प्रदर्शनी के पहले दिन दोनों कंपनियों ने इस साझेदारी पर औपचारिक हस्ताक्षर किए। इस प्रोजेक्ट के तहत अगले 12 महीनों तक सॉफ्टवेयर पर काम चलेगा, जिसके बाद 2027 के मध्य में इसके व्यावहारिक परीक्षण आयोजित किए जाएंगे। ब्रेकर इंडस्ट्रीज के सह-संस्थापक माइकल इरविन ने इस तकनीक का प्रदर्शन करते हुए बताया कि सैनिक जिस भाषा में आपस में बात करते हैं, ठीक उसी तरह के साधारण वॉयस कमांड का इस्तेमाल करके ड्रोनों को काम पर लगाया जा सकता है।
अब बोलकर कंट्रोल होंगे सैन्य ड्रोन ड्रोन संभालने के लिए अलग से नहीं चाहिए सैनिक
आमतौर पर बख्तरबंद गाड़ियों में ड्रोन चलाने के लिए अतिरिक्त जवानों की जरूरत पड़ती है। लेकिन इस नई प्रणाली की मदद से गाड़ी का कमांडर अपनी नियमित जिम्मेदारियां निभाते हुए भी वॉयस कमांड देकर आसपास के क्षेत्र का जायजा ले सकेगा। कंपनी ने महज छह महीने के भीतर इस प्रोजेक्ट की शुरुआती क्षमता का प्रदर्शन कर दिया था। परीक्षण के दौरान केवल 30 मिनट की ट्रेनिंग पाए एक सैनिक ने बॉक्सर के साधारण हेडसेट और माइक के जरिए ड्रोनों के एक पूरे झुंड (Drone Swarm) को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर लिया।
ऑस्ट्रेलियाई सेना में बड़े पैमाने पर शामिल हो रहे हैं बॉक्सर वाहन
ऑस्ट्रेलियाई सेना वर्तमान में 211 बॉक्सर वाहनों की खरीद कर रही है, जिनका निर्माण ब्रिस्बेन के पास स्थित राइनमेटल की फैक्ट्री में चल रहा है। ये गाड़ियां मुख्य रूप से टोही (Reconnaissance) इकाइयों के पास रहेंगी। पहाड़ी या मोड़ के पार क्या है, यह देखने के लिए ड्रोन और इस सॉफ्टवेयर का संयोजन सैनिकों के लिए बेहद मददगार साबित होगा। राइनमेटल डिफेंस ऑस्ट्रेलिया के प्रबंध निदेशक नाथन पॉयनर का कहना है कि यह तकनीक बख्तरबंद वाहनों की युद्ध क्षमता में बड़ा बदलाव लाएगी। यूरोप के अन्य देश, जो बॉक्सर गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं, वे भी भविष्य में इस सॉफ्टवेयर को अपना सकते हैं।
भविष्य में गाड़ियों को भी आवाज से चलाने की तैयारी
इरविन का मानना है कि आने वाले समय में केवल ड्रोन ही नहीं, बल्कि खुद बख्तरबंद गाड़ी और उसकी तोप (Turret) को भी आवाज से नियंत्रित किया जा सकेगा। उदाहरण के लिए, कमांडर सिर्फ बोलकर तोप को किसी खास दिशा में निगरानी करने का निर्देश दे सकेगा। हालांकि, उनका कहना है कि तकनीकी रूप से यह संभव है, लेकिन इसके पूर्ण इस्तेमाल से पहले कुछ नीतिगत और सैन्य प्रक्रियाओं से जुड़ी बाधाओं को पार करना होगा।
ऑस्ट्रेलिया में ही बन रहे हैं 50% से अधिक कलपुर्जे
नाथन पॉयनर के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई सेना के लिए तैयार किए जा रहे बॉक्सर वाहनों के छह अलग-अलग रूपों (Variants) में से पांच का विकास पूरा हो चुका है। इनमें से आधे से ज्यादा स्पेयर पार्ट्स और तकनीक स्थानीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया में ही तैयार की जा रही है। कंपनी अब ऑस्ट्रेलियाई सेना के साथ इसके नए रूपों को लेकर भी चर्चा कर रही है, जिसमें ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने के लिए 'स्काईरेंजर 30' तोप से लैस काउंटर-ड्रोन वेरिएंट प्रमुख है।