Anti Drone Defense System: ड्रोन तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने जहां कई राहें आसान की हैं, वहीं सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। चाहे प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में उड़ने वाले शौकिया ड्रोन हों या फिर सैन्य ठिकानों पर हमले की नीयत से भेजे गए मानवरहित विमान, खतरे का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसी समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालते हुए हनीवेल एयरोस्पेस ने 'समुराई' (SAMURAI) नाम से एक आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक पेश की है, जो कई तरह के सुरक्षा सेंसरों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है।
आठ अलग-अलग स्क्रीन के झंझट से मुक्ति
आमतौर पर ड्रोन-रोधी प्रणालियों को संचालित करने वाले ऑपरेटरों को रडार, ऑप्टिकल कैमरे, रेडियो-फ्रीक्वेंसी (RF) सेंसर, एकॉस्टिक उपकरण और जैमिंग सिस्टम जैसी तकनीकों को अलग-अलग मॉनिटर पर देखना पड़ता है। कई बार सात या आठ स्क्रीन पर एक साथ नज़र रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है और त्वरित निर्णय लेने में देरी की गुंजाइश बनी रहती है। हनीवेल की समुराई (Stationary and Mobile UAS Reveal and Intercept) प्रणाली इस समस्या को खत्म करती है। यह सिस्टम कंपनी के युद्ध-प्रबंधन सॉफ्टवेयर 'UNITAS' का उपयोग करता है। यह सॉफ्टवेयर सभी अलग-अलग डेटा स्रोतों और सेंसरों की जानकारी को मिलाकर एक ही इंटरफेस (Single Pane of Glass) पर दिखाता है। इससे सुरक्षाकर्मियों के लिए खतरे को भांपना और उस पर तुरंत एक्शन लेना काफी आसान हो जाता है।
पुराने उपकरणों से भी हो जाएगा इंटीग्रेशन
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका 'ओपन-आर्किटेक्चर' डिज़ाइन है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्राहकों या एजेंसियों को अपनी मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों को फेंककर नए सिरे से महंगे उपकरण खरीदने की जरूरत नहीं है। कंपनी के मुताबिक, यह सॉफ्टवेयर अन्य निर्माताओं के सेंसरों और हथियारों के साथ भी आसानी से तालमेल बिठा लेता है। एजेंसियां अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से रडार, नेटवर्क, कैमरे या जैमिंग तकनीक चुन सकती हैं और भविष्य में नई तकनीकों के आने पर उन्हें आसानी से अपडेट भी कर सकती हैं।खतरे को बेअसर करने के तरीके
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग: ड्रोन के सिग्नल या जीपीएस को काटकर उसे बेअसर करना।
- अवरोधक ड्रोन व जाल (Nets): घनी आबादी या संवेदनशील संपत्तियों के पास मलबे के नुकसान को रोकने के लिए जाल का इस्तेमाल।
- लेज़र व पारंपरिक हथियार: सीधे और गंभीर हमलों को नाकाम करने के लिए गाइडेड एनर्जी या हथियारों का प्रयोग।
जमीन से लेकर आसमान तक तैनाती
यह प्रणाली सिर्फ एक जगह टिककर काम करने तक सीमित नहीं है। इसे स्थायी सुरक्षा ठिकानों, समुद्री जहाजों और मोबाइल गाड़ियों पर तैनात किया जा सकता है। हाल ही में एसोसिएशन ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी की बैठक में कंपनी ने फोर्ड एफ-150 ट्रक पर लगे इसके एक मोबाइल मॉडल का प्रदर्शन भी किया था। इसके अलावा, हनीवेल एयरोस्पेस मार्च 2026 में घोषित साझेदारी के तहत ओडिस एविएशन के लंबी दूरी के ड्रोन 'लैला' (Laila) पर भी समुराई सिस्टम को इंटीग्रेट कर रही है, जो इसे हवाई सुरक्षा कवरेज देने में सक्षम बनाएगा।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भरोसा
सुरक्षा क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए हनीवेल की सहायक कंपनी 'ईएमएस डिफेंस टेक्नोलॉजीज' को अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी से 1.5 अरब डॉलर तक की सीमा वाला पांच साल का एंटी-ड्रोन अनुबंध मिला है। इसके अलावा कंपनी लिथुआनिया, स्लोवाकिया और कोलंबिया जैसे कई अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर भी काम कर रही है। कंपनी सुरक्षा स्थलों के सटीक मूल्यांकन (Red-Team Assessment) में भी मदद करती है, जिससे यह तय किया जा सके कि रडार और कैमरों को किस कोण पर लगाया जाए ताकि किसी भी तरह का 'ब्लाइंड स्पॉट' न रहे।







