Saudi Houthi Conflict: लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब पर हूथियों के बढ़ते प्रभाव को खत्म करने के लिए सऊदी अरब यमन में बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। क्षेत्रीय और पश्चिमी अधिकारियों के मुताबिक, रियाद हूथियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीमित तटीय अभियान से लेकर यमन के कई इलाकों में एक साथ हमले तक के विकल्पों पर विचार कर रहा है। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, अभियान की अगुवाई यमनी सेना कर सकती है, जबकि उसे सऊदी अरब की हवाई ताकत का समर्थन मिलेगा।
हमले की योजना और संभावित रणनीति
रियाद फिलहाल दो प्रमुख रणनीतियों पर विचार कर रहा है: सीमित कार्रवाई: बाब अल-मंडेब के रणनीतिक इलाके पर केंद्रित हमला, ताकि जहाजों की आवाजाही को तुरंत सुरक्षित किया जा सके। व्यापक अभियान: अल-बायदा, मारिब, तैज़ और अल-जॉफ जैसे कई मोर्चों पर एक साथ समन्वित हमले। अनुमान है कि इस बड़े सैन्य अभियान में 1,00,000 से अधिक यमनी सैनिकों की तैनाती की जा सकती है।
सैन्य कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी ?
साल 2022 के युद्धविराम के बाद यमन में स्थिति काफी हद तक शांत थी, लेकिन हाल के महीनों में हाउथी लड़ाकों ने तेजी से आगे बढ़ते हुए लाल सागर के तटीय क्षेत्रों और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लिया। यह जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील मार्ग है। सऊदी रणनीतिकारों का मानना है कि जब तक इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर हाउथी विद्रोहियों का कब्जा रहेगा, तब तक उनसे किसी भी तरह की शांति वार्ता करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि इससे उन्हें वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने की ताकत मिलती है।अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा की चिंताएँ
इस अभियान में रियाद को अपने वैश्विक और क्षेत्रीय सहयोगियों से विभिन्न स्तरों पर मदद मिल रही है: अमेरिका: वाशिंगटन यमनी सेना और सऊदी वायुसेना को सैन्य सलाहकारों और सटीक खुफिया जानकारी के जरिए मदद कर रहा है। पाकिस्तान और तुर्की: पाकिस्तान ने वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन रोधी उपकरण और सैन्य सलाहकार भेजे हैं। इसके अलावा, सऊदी अरब की सीमाओं और तेल बुनियादी ढांचों की रक्षा के लिए पाकिस्तानी सैनिक भी तैनात किए गए हैं। वहीं, यमन के आसमान में तुर्की निर्मित ड्रोन भी सक्रिय हैं। फ्रांस: फ्रांसीसी सेना लाल सागर के प्रमुख बंदरगाह शहर यानबू की सुरक्षा में सहयोग दे रही है।

