BrahMos NG Missile: 2028 तक तैयार हो सकता है ब्रह्मोस का नया वर्जन, जानिए क्या होगा खास
BrahMos NG Missile: भारत और रूस की संयुक्त परियोजना BrahMos-NG का पहला प्रोटोटाइप 2027-28 तक तैयार करने का लक्ष्य है। यह मिसाइल मौजूदा ब्रह्मोस की तुलना में छोटी, हल्की और आधुनिक तकनीक से लैस होगी। इसका शुरुआती फोकस भारतीय वायुसेना के लिए एयर-लॉन्च वर्जन विकसित करना है।
प्रकाशित: 25 Oct 2026, 06:50 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
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BrahMos NG Missile: भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक छलांग लगाने की तैयारी चल रही है। भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने अपने सबसे घातक हथियार ब्रह्मोस का अगला यानी नेक्स्ट-जेन वर्जन लाने का लक्ष्य तय कर लिया है। साल 2027-28 तक इसका पहला प्रोटोटाइप तैयार होने की उम्मीद है। यह नया अवतार आकार में छोटा, वजन में हल्का और पहले से कहीं अधिक स्टील्थ यानी रडार की पकड़ से बाहर रहने वाला होगा। वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसका एयर-लॉन्च यानी हवाई वर्जन सबसे पहले प्राथमिकता में है।
क्या खास होगा ब्रह्मोस-एनजी में?
ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) को मौजूदा मिसाइल का ज्यादा कॉम्पैक्ट और आधुनिक रूप दिया जा रहा है।
आकार और डिजाइन: छोटा आकार होने की वजह से इसे अलग-अलग फाइटर जेट्स पर आसानी से फिट किया जा सकेगा।
स्वदेशी तकनीक: इस प्रोजेक्ट में स्वदेशी उपकरणों और साजो-सामान की हिस्सेदारी बढ़ाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है।
लॉन्च प्राथमिकता: कंपनी की योजना पहले इसे हवा से मार करने वाले वर्जन के रूप में उतारने की है, जिसके बाद जमीन और समुद्र से दागे जाने वाले संस्करणों पर भी काम शुरू किया जाएगा।
मौजूदा ब्रह्मोस की ताकत और भविष्य की लंबी रेंज का प्लान
फिलहाल भारतीय सेना के बेड़े में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल अपनी सुपरसोनिक रफ्तार और अचूक निशाने के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है। इसकी मौजूदा तकनीकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:
मारक दूरी (Range): आधिकारिक तौर पर 290 किलोमीटर तक।
रफ्तार (Speed): क्रूज चरण के दौरान लगभग 2.8 मैक, यानी ध्वनि की गति से करीब 2.8 गुना तेज।
पेलोड (Payload): अधिकतम 200 किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड।
मई 2025 के दौरान हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' में ब्रह्मोस का सक्रिय युद्धक अभियानों में इस्तेमाल किया गया था। कंपनी का दावा है कि इस दौरान दुश्मन के डिफेंस सिस्टम इस मिसाइल को इंटरसेप्ट करने में पूरी तरह नाकाम रहे। इस कामयाब अनुभव के बाद अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की इस सुपरसोनिक मिसाइल की डिमांड तेजी से बढ़ी है। फिलीपींस के साथ हुई सफल डील के बाद अब इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देश भी इसमें गहरी रुचि दिखा रहे हैं, जिससे इसका कुल रक्षा निर्यात 600 मिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है।
मेक इन इंडिया और बढ़ता उत्पादन दायरा
बढ़ती ग्लोबल डिमांड और भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस अपने उत्पादन नेटवर्क को तेजी से फैला रहा है। देश के प्रमुख शहरों जैसे हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ की यूनिट्स इस दिशा में बड़े पैमाने पर जुटी हुई हैं। इसके साथ ही, सप्लाई चेन को और अधिक मजबूत करने के लिए विभिन्न कलपुर्जे बनाने वाले सप्लायर्स की संख्या में भी बड़ा इजाफा किया गया है, ताकि 'मेक इन इंडिया' के इस ब्रह्मास्त्र की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।