Military Base Protection: मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका अब अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को पहले से अधिक मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए अमेरिकी वायु सेना मोबाइल 3D कंक्रीट प्रिंटर विकसित करने की योजना बना रही है। इस तकनीक की मदद से सैन्य अड्डों पर कम समय में ऐसी इमारतें तैयार की जा सकेंगी, जो मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान सैनिकों को बेहतर सुरक्षा दे सकें।
मौजूदा सैन्य ढांचे में बदलाव की जरूरत
अमेरिकी वायु सेना ने अपने लघु व्यवसाय नवाचार अनुसंधान (SBIR) कार्यक्रम के तहत इस परियोजना को प्राथमिकता दी है। इसके दस्तावेज में स्वीकार किया गया है कि अब तक सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक हथियारों पर काफी निवेश हुआ है, लेकिन सैन्यकर्मियों के रहने और काम करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई अस्थायी ढांचे आधुनिक हमलों के खतरे को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किए गए हैं। तंबू, ट्रेलर और साधारण दीवारों वाली इमारतें ऐसे खतरों के सामने पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पातीं। इसी कमी को दूर करने के लिए वायु सेना ऐसी निर्माण तकनीक चाहती है, जिसे जरूरत पड़ने पर सीधे सैन्य ठिकानों पर इस्तेमाल किया जा सके।
कैसे काम करेगी 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक?
3D कंक्रीट प्रिंटिंग में विशेष मशीनों के जरिए सीमेंट आधारित मिश्रण की एक के बाद एक परतें जमा की जाती हैं। इस प्रक्रिया से कम समय में दीवारें और अन्य निर्माण संरचनाएं तैयार की जा सकती हैं। पारंपरिक निर्माण के मुकाबले इसमें मानवीय श्रम की जरूरत भी कम पड़ सकती है। अमेरिकी वायु सेना इस तकनीक का इस्तेमाल पहले भी कर चुकी है। वर्ष 2023 में फ्लोरिडा के टिंडल एयर फोर्स बेस के पुनर्निर्माण में 3D प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया गया था। इसके अलावा मैरीलैंड एयर नेशनल गार्ड की एक सिविल इंजीनियरिंग इकाई भी मोबाइल कंक्रीट प्रिंटर विकसित करने पर काम कर रही है।मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव पर रहेगा जोर
नई परियोजना का उद्देश्य केवल तेजी से इमारतें खड़ी करना नहीं है, बल्कि ऐसी संरचनाएं तैयार करना है, जो विस्फोट और हमलों के प्रभाव को कम कर सकें। वायु सेना के मुताबिक, मौजूदा 3D प्रिंटिंग तकनीक अभी इस चुनौती का पूरी तरह समाधान नहीं कर पाई है। परियोजना के तहत कंक्रीट मिश्रण की मजबूती, अलग-अलग परतों के बीच पकड़ और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध निर्माण सामग्री की उपयोगिता का परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही भवनों के डिजाइन में भी बदलाव किए जाएंगे। ऐसी संरचनाएं विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा, जिनकी बनावट विस्फोट से पैदा होने वाली दबाव तरंगों के प्रभाव को कम करे, मलबे और धातु के टुकड़ों के फैलाव को रोके तथा इमारत के भीतर मौजूद लोगों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करे।
कम प्रशिक्षण वाले सैनिक भी चला सकेंगे मशीन
वायु सेना की योजना ऐसे मोबाइल प्रिंटर तैयार करने की है, जिन्हें सैन्य इंजीनियर कठिन परिस्थितियों में भी इस्तेमाल कर सकें। मशीनों का संचालन स्वचालित या अर्ध-स्वचालित होगा, ताकि कम प्रशिक्षित कर्मी भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्माण कार्य पूरा कर सकें। इसके लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें मशीन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना, स्थापित करना, प्रिंटिंग करना और तैयार ढांचे का निरीक्षण करना आसान हो।







