Australia Naval Defence: ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नौसैनिक ताकत को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश की नौसेना अब अत्याधुनिक स्वायत्त अंडरवाटर ड्रोन 'घोस्ट शार्क' को अलग-अलग सैन्य अभियानों के लिए तैयार कर रही है। खास बात यह है कि इन ड्रोन में समुद्री माइंस, निगरानी और हमला करने वाले हथियारों के साथ-साथ रसद सामग्री ले जाने की क्षमता भी विकसित की जा रही है। 19 अक्टूबर को सिडनी स्थित रक्षा कंपनी एंडुरिल ऑस्ट्रेलिया के मैन्युफैक्चरिंग सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान घोस्ट शार्क के तीन अलग-अलग पेलोड सार्वजनिक किए गए। अब तक इस परियोजना की क्षमताओं को काफी हद तक गोपनीय रखा गया था।
तीन तरह के पेलोड का हुआ प्रदर्शन
कार्यक्रम में प्रदर्शित तीन पेलोड में पहला समुद्री माइंस तैनात करने के लिए तैयार किया गया है। दूसरा एंडुरिल के अल्टियस-600 लोइटरिंग म्यूनिशन से लैस है, जबकि तीसरे पेलोड में सैन्य रसद और जरूरी आपूर्ति सामग्री रखी जा सकती है। इनमें से दो पेलोड सीधे तौर पर हमलावर क्षमता बढ़ाते हैं। समुद्री माइंस से लैस घोस्ट शार्क दुश्मन के जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए समुद्र में अवरोध तैयार कर सकता है। वहीं, अल्टियस-600 निगरानी के साथ हमला करने की क्षमता भी रखता है। इस तकनीक के जरिए एक ही मानवरहित अंडरवाटर ड्रोन समुद्र के भीतर कई तरह के सैन्य मिशन पूरे कर सकता है।
मिशन के हिसाब से बदले जा सकेंगे हथियार
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विभाग के मुताबिक, घोस्ट शार्क का मॉड्यूलर डिजाइन इसकी सबसे बड़ी खासियत है। जरूरत के अनुसार इसमें अलग-अलग पेलोड लगाए जा सकते हैं। इससे एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई तरह के अभियानों में करना संभव होगा। आने वाले समय में इसके लिए हल्के और भारी टॉरपीडो के साथ इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े पेलोड भी विकसित किए जाने की संभावना है। इससे घोस्ट शार्क की भूमिका सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि समुद्र के भीतर सैन्य अभियानों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है।छोटे जहाजों और शिपिंग कंटेनरों से भी होगी तैनाती
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा उद्योग मंत्री पैट कॉनरॉय ने बताया कि घोस्ट शार्क को तैनात करने के लिए बड़े युद्धपोतों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। इसे शिपिंग कंटेनरों, छोटे जहाजों के पिछले हिस्से और समुद्री घाटों से भी ऑपरेशन के लिए रवाना किया जा सकता है। इस व्यवस्था से इसकी तैनाती के तरीके को लेकर विरोधियों के लिए अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। अलग-अलग स्थानों से इनका संचालन करने की क्षमता ऑस्ट्रेलियाई नौसेना को रणनीतिक बढ़त दे सकती है।
परमाणु पनडुब्बियों के इंतजार के बीच बड़ी तैयारी
ऑस्ट्रेलिया फिलहाल अपनी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के बेड़े के लिए इंतजार कर रहा है। ऐसे में घोस्ट शार्क जैसी स्वायत्त प्रणालियां नौसेना की मौजूदा क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। देश की छह पुरानी कॉलिन्स-क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां अभी भी सेवा में हैं। नई तकनीक के जरिए समुद्री निगरानी, पनडुब्बी युद्ध और समुद्र तल पर मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे अभियानों को मजबूती देने की योजना है।1.7 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का निवेश
ऑस्ट्रेलिया सरकार घोस्ट शार्क कार्यक्रम पर करीब 1.7 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च कर रही है। अमेरिकी मुद्रा में यह रकम लगभग 1.2 अरब डॉलर के बराबर है। इस परियोजना के तहत दर्जनों एक्स्ट्रा लार्ज ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (XLAUV) तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, इनकी सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है। एंडुरिल ऑस्ट्रेलिया ने एक साल से भी कम समय पहले अपनी निर्माण इकाई शुरू की थी। रक्षा उद्योग मंत्री पैट कॉनरॉय के मुताबिक, घोस्ट शार्क की डिलीवरी अब तेजी से नौसेना तक पहुंच रही है।







