INS Vikrant: राफेल-M से मजबूत होगी भारतीय नौसेना, INS Vikrant पर सफल लैंडिंग
INS Vikrant पर Rafale-M लड़ाकू विमान की सफल लैंडिंग से भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। फ्रांस से 26 राफेल मरीन विमानों की खरीद के बाद हिंद महासागर में भारत की निगरानी और सैन्य क्षमता का विस्तार होगा।
INS Vikrant: हिंद महासागर में भारत की समुद्री ताकत को एक नई और अभूतपूर्व उड़ान मिली है। स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) की डेक पर अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल मरीन (Rafale-M) की सफ़ल लैंडिंग ने
भारतीय नौसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 29 अक्टूबर को हुए इस ऐतिहासिक ट्रायल ने यह साफ़ कर दिया है कि आने वाले समय में हिंद महासागर में भारत का दबदबा और अधिक अभेद्य होने वाला है। फ्रांस से 26 राफेल मरीन विमानों की खरीद प्रक्रिया के बीच यह परीक्षण इसलिए भी खास है, क्योंकि आईएनएस विक्रांत (जो STOBAR यानी स्की-जंप तकनीक पर काम करता है) को इन CATOBAR-डिज़ाइन फाइटर जेट्स को संभालने के अनुकूल ढाला गया है।
चीन की उड़ी नींद: बीजिंग की पैनी नज़र के मायने
दिलचस्प बात यह है कि इस सफल ट्रायल पर भारतीय मीडिया से ज्यादा नजर चीनी रक्षा विशेषज्ञों और उनके सरकारी भोंपू 'ग्लोबल टाइम्स' की रही। बीजिंग के मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Guancha में इस लैंडिंग की पल-पल की रिपोर्टिंग की गई। चीनी मीडिया ने भले ही तकनीकी दलीलें देकर इसे अपने एयरक्राफ्ट कैरियर्स के मुकाबले कम आंकने की कोशिश की हो, लेकिन सच्चाई यह है कि विक्रांत और
राफेल का यह नया मेल ड्रैगन की चिंता की सबसे बड़ी वजह बन चुका है। हिंद महासागर में भारत की बढ़ती धमक से चीन की रणनीति को गहरा झटका लगा है।
गेम-चेंजर साबित होगा राफेल-M: रक्षा विशेषज्ञ की ज़बानी
नौसेना के पूर्व अधिकारी और 35 वर्षों का अनुभव रखने वाले कैप्टन अनुराग बिसेन (जिन्होंने शक्तिशाली सिंधुघोष क्लास पनडुब्बी की कमान संभाली है) के अनुसार, राफेल-मरीन भारतीय नौसैनिक विमानन (Naval Aviation) के पूरे परिदृश्य को बदलकर रख देगा। कैप्टन बिसेन बताते हैं कि पिछले दो दशकों से भारतीय नौसेना सीमित क्षमता वाले मिग-29K (MiG-29K) पर निर्भर थी। विक्रांत जैसा शक्तिशाली युद्धपोत होने के बावजूद मिग की 'बियॉन्ड-विजुअल-रेंज' हमला करने की क्षमता सीमित थी। लेकिन राफेल-M के आते ही यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
मारक क्षमता और रेंज में अभूतपूर्व इजाफा:
15,000 किमी की यात्रा क्षमता: आईएनएस विक्रांत खुद 8,000 समुद्री मील (लगभग 15,000 किमी) तक गश्त लगा सकता है। राफेल के जुड़ने से इसकी पहुंच कई गुना बढ़ जाती है।
1000+ किमी की स्ट्राइक रेंज: मिग-29 की रेंज जहाँ 750-800 किमी थी, वहीं राफेल 1,000 किमी से अधिक दूरी तक हमला कर सकता है।
मिड-एयर रिफ्यूलिंग: हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा मिलने के बाद राफेल मरीन की रेंज बढ़कर 1,800 से 2,000 किलोमीटर तक पहुँच जाती है।
घातक मिसाइलों का संगम: 300 किमी रेंज वाली SCALP क्रूज मिसाइल और राफेल की अपनी रेंज मिलकर 1,200 से 1,300 किमी दूर स्थित लक्ष्य को आसानी से तबाह कर सकती हैं।
दुश्मन के युद्धपोतों के लिए 'नो एस्केप ज़ोन'
राफेल मरीन सिर्फ लंबी दूरी की उड़ान ही नहीं भरता, बल्कि इसका हथियार प्रणाली नेटवर्क दुश्मन के लिए काल समान है:
Meteor और SCALP मिसाइलें: ये हवा से हवा और हवा से सतह पर मार करने वाली ऐसी मिसाइलें हैं जो दुश्मन के लिए 'नो एस्केप ज़ोन' बनाती हैं।
Exocet AM39 एंटी-शिप मिसाइल: यह वही मिसाइल है जिससे चीन सबसे ज्यादा घबराया हुआ है। यह दुश्मन के बड़े से बड़े युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर को एक झटके में ध्वस्त कर सकती है।
AESA रडार और SPECTRA सूट: राफेल का अत्याधुनिक AESA रडार एक साथ कई टारगेट को ट्रैक करता है, जबकि SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम दुश्मन के रडार को चकमा देकर मिसाइल हमलों से विमान को पूरी तरह सुरक्षित रखता है।
मलक्का से अदन तक भारत का सुरक्षा कवच
मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) से लेकर अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) तक फैले विशाल समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा का ज़िम्मा भारतीय नौसेना के कंधों पर है। अप्रैल 2025 में 63,000 करोड़ रुपये की लागत से 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों का ऑर्डर फाइनल किया गया है, जिनकी डिलीवरी 2028 के अंत से शुरू होगी। इन विमानों को आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य दोनों पर उच्च 'मिशन उपलब्धता' के साथ तैनात किया जाएगा। इस कॉम्बिनेशन से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता में 3 गुना से अधिक की वृद्धि होगी, जो किसी भी संभावित संघर्ष स्थिति में भारत को निर्णायक बढ़त दिलाएगी।