Illegal Injection Smuggling: मुरैना में नशे के इंजेक्शनों का बड़ा खेल, पुलिस ने ग्राहक बनकर पकड़े 2856 इंजेक्शन
मध्य प्रदेश के मुरैना में कोतवाली पुलिस ने प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शनों के अवैध कारोबार का खुलासा किया है। पुलिस ने ग्राहक बनकर छापेमारी की और 2,856 इंजेक्शन जब्त किए, जिनकी कीमत करीब 4.50 लाख रुपये बताई गई है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को इन इंजेक्शनों की सप्लाई के तार आगरा से जुड़े होने की जानकारी मिली है।
Illegal Injection Smuggling: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में नशे के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने एक बेहद शातिर और रोमांचक कार्रवाई को अंजाम दिया है। कोतवाली पुलिस ने नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित इंजेक्शनों के एक बड़े जखीरे का पर्दाफाश किया है। इस रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए खुद पुलिसकर्मियों को 'खरीददार' बनना पड़ा। आरोपियों के चंगुल से कुल 2856
अवैध इंजेक्शन जब्त किए गए हैं, जिनकी बाजार कीमत करीब 4.50 लाख रुपये आंकी गई है।
मुखबिर की सूचना पर रची गई पूरी रणनीति
बीते कुछ दिनों से मुरैना में अवैध रूप से मेडिकल स्टोरों के जरिए टर्मिन इंजेक्शन बेचे जाने के वीडियो लगातार वायरल हो रहे थे। स्वास्थ्य विभाग इस मामले में पहले ही दो मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई कर चुका था। इसी बीच, शनिवार शाम पुलिस अधीक्षक (एसपी) धर्मराज मीना को एक खास मुखबिर से सूचना मिली कि पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान से नशे के इन इंजेक्शनों का काला कारोबार चल रहा है और वहां भारी खेप आई है। सूचना पुख्ता थी, लेकिन आरोपियों तक पहुंचना आसान नहीं था। ऐसे में एसपी ने एक जोखिम भरा प्लान बनाया और पुलिसकर्मियों को ही ग्राहक बनाकर भेजने का फैसला किया।
ऐसे खुला राज: सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मी
योजना के तहत कोतवाली टीआई अमित भदौरिया ने एसआई अरुण कुशवाह और एसआई पवन भदौरिया को सादी वर्दी में ग्राहक बनाकर पुरानी हाउसिंग बोर्ड स्थित उस मकान में भेजा, जिसे ईशान वर्मा नाम के युवक ने किराए पर ले रखा था। पुलिसकर्मी जब खरीदार बनकर अंदर पहुंचे, तो ईशान ने बिना किसी शक के उन्हें
इंजेक्शन थमा दिए। सौदा पक्का होते ही बाहर तैनात पुलिस टीम ने मकान पर अचानक छापा (दबिश) मार दिया। कमरे के भीतर का नजारा देखकर पुलिस भी हैरान रह गई—वहाँ 106 पैकेट, तीन बड़े कार्टन और एक प्लास्टिक के बोरे में कुल 2856 प्रतिबंधित इंजेक्शन भरे पड़े थे, जो मुख्य रूप से 'टर्मिन' और उससे मिलते-जुलते ड्रग्स थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपी और जब्ती का पूरा ब्योरा
मौके से पुलिस ने तीन लोगों को दबोचा है, जो इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे थे:
ईशान वर्मा (30 वर्ष) पुत्र नरेंद्र वर्मा, निवासी विक्रम नगर (मकान का किराएदार)
मयंक गुप्ता (35 वर्ष) पुत्र मुन्नालाल गुप्ता, निवासी राठौर कॉलोनी, बालाजी पैलेस के पास
अनिल उर्फ बाबी गुप्ता (51 वर्ष) पुत्र लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता, निवासी फाटक बाहर, बालाजी अपार्टमेंट
इन तीनों आरोपियों के पास दवाइयों के स्टोरेज या मेडिकल संचालन से जुड़ा कोई भी वैध लाइसेंस नहीं मिला। पुलिस ने इनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 18(सी), 27(बी)(II) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
बरामद इंजेक्शनों की सूची:
मेफिन टर्माइन सल्फेट इंजेक्शन: 106 पैकेट (कुल 1060 इंजेक्शन)
एक कार्टन (टर्मिन कंपनी): 47 पैकेट (470 इंजेक्शन)
प्लास्टिक का बोरा: टर्मिन के 336 इंजेक्शन
एक कार्टन (मैको कंपनी): 330 इंजेक्शन
एक कार्टन (मेप्रो कंपनी): 560 इंजेक्शन
आगरा के हामिद से जुड़े हैं इस खेल के तार
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि मुरैना में खपाए जा रहे इन इंजेक्शनों की सप्लाई उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से होती थी। आरोपी आगरा के रामबाग इलाके में रहने वाले हामिद खान के संपर्क में थे। वे हामिद को पैसे ऑनलाइन या माध्यमों से भेजते थे और वह मांग के हिसाब से कूरियर या अन्य तरीकों से खेप यहाँ भेज देता था। फिलहाल, मुरैना पुलिस अब आगरा के इस मुख्य सप्लायर हामिद खान की तलाश में जुटी है।
जानलेवा है इस नशे का जाल, डकैत से लेकर युवाओं तक है लत
विशेषज्ञ बताते हैं कि 'टर्मिन' जैसे इंजेक्शन असल में उन गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक माने जाते हैं, जिनका ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) अचानक बेहद खतरनाक स्तर तक गिर जाता है। इसे लगाने से रक्तचाप तुरंत संभल जाता है और यह सर्जरी के दौरान भी काम आता है।
लेकिन मुरैना में इसका इस्तेमाल नशे के रूप में धड़ल्ले से हो रहा है। हालात यह हैं कि:
दो महीने पहले पोरसा इलाके में एक युवक ने इसी नशे की लत से तंग आकर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 60 हजार रुपये का इनामी फरार डकैत कल्ली गुर्जर भी इसी टर्मिन इंजेक्शन का आदी बताया जाता है।
नशेड़ी इस भारी ड्रग को सीधे नसों में लेते हैं, जिससे उन्हें तेज नशा होता है।
यह जहर मुरैना शहर से लेकर अंबाह, पोरसा, कैलारस और जौरा जैसे ग्रामीण व शहरी इलाकों के युवाओं की नसों में तेजी से उतर रहा है, जिस पर समय रहते लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया है।