Ganja Smuggling: जबलपुर में 871 किलो गांजा जब्त, पेंट के 412 डिब्बों के बीच छिपाई थी 4.5 करोड़ की खेप
Ganja Smuggling: मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस ने बड़ी गांजा तस्करी का खुलासा करते हुए कंटेनर से 871 किलो 95 ग्राम गांजा बरामद किया है। तस्करों ने गांजे की 28 बोरियों को 412 पेंट के डिब्बों के बीच छिपाया था। जब्त गांजे की कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपये बताई गई है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
Ganja Smuggling: जबलपुर की सड़कों पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस ने एक ऐसे शातिर तरीके से हो रही तस्करी का पर्दाफाश किया, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। पेंट के डिब्बों की आड़ में
गांजे का ऐसा खेल चल रहा था, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आइए जानते हैं इस पूरी फिल्मी अंदाज में हुई कार्रवाई की पूरी कहानी।
पेंट के डिब्बों में छिपा था 'सफेद जहर'
तस्करों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक बेहद शातिर पैंतरा अपनाया था। उन्होंने एक बड़े कंटेनर (ट्रक) में 412 पेंट के डिब्बे इस तरह सजाए थे कि किसी को भी इसके अंदर कुछ गलत होने का शक न हो। लेकिन इन डिब्बों के ठीक बीचो-बीच गांजे की 28 बोरियां बेहद चालाकी से छिपाई गई थीं। तस्करों का मकसद साफ था—पुलिस या किसी भी जांच एजेंसी को लगे कि ट्रक में सिर्फ पेंट का सामान जा रहा है।
ऐसे बिछाया गया जाल और पकड़ा गया कंटेनर
शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात जबलपुर-कटनी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर माजरा कुछ और ही था। गोसलपुर पुलिस और उत्तर प्रदेश की नारकोटिक्स विंग को पहले से ही इस भारी खेप की भनक लग चुकी थी। दोनों टीमों ने मिलकर एक संयुक्त योजना बनाई। रात के सन्नाटे में जब
पुलिस गश्त कर रही थी, तभी मुस्करा मोड़ के पास एक तेज रफ्तार कंटेनर (क्रमांक NL-01-AC-7191) गुजरता हुआ दिखा। गाड़ी की रफ्तार और संदिग्ध गतिविधियों को भांपते हुए पुलिस ने तुरंत उसका पीछा करना शुरू कर दिया। मोहतरा टोल प्लाजा के पास आते-आते पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी कर ट्रक को रोक ही लिया।
ठीक उसी वक्त, पीछे से उत्तर प्रदेश के झांसी की नारकोटिक्स विंग की टीम भी वहां पहुंच गई। जब कंटेनर की तलाशी ली गई, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। ट्रक से कुल 871 किलो 95 ग्राम गांजा बरामद हुआ, जिसकी अंतरराष्ट्रीय और खुला बाजार में कीमत करीब साढ़े चार करोड़ रुपए आंकी जा रही है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
कौन हैं ये शातिर तस्कर?
घेराबंदी देखकर कंटेनर में सवार दोनों लोगों ने भागने की नाकाम कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
धर्मवीर सिंह (45 वर्ष): निवासी नागला कलुआ बुरावा कालिनजरी बेस्वान, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)।
विक्रम कर्माकर (24 वर्ष): निवासी पतिराम, बालुरघाट, दक्षिण दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल)।
खास बात यह है कि गिरफ्तार हुआ धर्मवीर सिंह खुद उस कंटेनर का मालिक है और वही गाड़ी चला रहा था। दूसरा आरोपी विक्रम कर्माकर, धर्मवीर के ही परिवार के एक रिश्तेदार का बेटा है। तस्करों ने पुलिस से बचने के लिए गांजे को छोटे-छोटे पैकेटों में भरकर उन पर मजबूत टेप लपेट रखा था, ताकि अगर डिब्बे खुल भी जाएं तो एकदम से किसी को कुछ न दिखे।
विशाखापट्टनम से शुरू हुआ खेल, मैहर में उतरना था माल
पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया। पूछताछ में आरोपी धर्मवीर ने जो खुलासे किए, उसने पुलिस के भी कान खड़े कर दिए। धर्मवीर ने बताया कि वह 19 अक्टूबर को विशाखापट्टनम से सामान्य माल लेकर अंबाला के लिए निकला था। रास्ते में ओडिशा के बलांगीर निवासी प्रभात साहू ने उससे संपर्क किया और उसे मध्य प्रदेश में गांजे की यह बड़ी खेप पहुंचाने का जिम्मा सौंपा। तय योजना के मुताबिक, 27 अक्टूबर को प्रभात के ठिकाने से ही गांजे की ये 28 बोरियां कंटेनर में लोड की गई थीं। इस माल को मध्य प्रदेश के मैहर इलाके में (जियो पेट्रोल पंप के पास) डिलीवर किया जाना था।
हर ट्रिप के मिलते थे 1 लाख रुपए
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि धर्मवीर पहली बार यह काम नहीं कर रहा था। वह पहले भी प्रभात के इशारे पर गांजे की खेप मध्य प्रदेश तक पहुंचा चुका है। इस अवैध धंधे के बदले उसे हर एक ट्रिप के लिए एक लाख रुपए मिलते थे। फिलहाल, गोसलपुर पुलिस और नारकोटिक्स विंग दोनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और ओडिशा से लेकर मध्य प्रदेश तक फैला यह जाल कितना गहरा है।