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पानी के लिए हाहाकार
पानी के लिए हाहाकार
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

बुझ रही प्यास : छत्तीसगढ़ के नवापारा में एक सूखे कुएं के भरोसे 300 जिंदगियां, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के नवापारा गांव में भीषण जल संकट के कारण ग्रामीण गहरे और लगभग सूख चुके कुएं से जान जोखिम में डालकर पानी निकालने को मजबूर हैं। वायरल वीडियो में ग्रामीण महिपाल सिंह कुएं के तल तक उतरकर पानी भरते नजर आए।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 11 Jun 2026, 02:51 PM · अपडेट: 16 Oct 2026, 11:50 AM
मनेंद्रगढ़-चिरमीरी-भरतपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में स्थित एमसीबी जिले से मानवीय संघर्ष और जल संकट की एक ऐसी दर्दनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लोहारी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले लगभग 300 आबादी वाले छोटे से गांव नवापारा में पानी की बूंद-बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है।

इस गांव के निवासी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर एक बेहद गहरे और लगभग सूख चुके कुएं के भीतर उतरते हैं। कुएं की भीतरी दीवारें इतनी फिसलन भरी हैं कि जरा सा पैर फिसला तो सीधा मौत से सामना हो। लेकिन गाँव की प्यास बुझाने के जुनून में महिपाल सिंह संतुलन बनाते हुए कुएं के तल तक पहुंचते हैं, जहां नाममात्र का गंदा पानी बचा है। वहां से वे बाल्टियों और प्लास्टिक के बर्तनों में पानी भरकर ऊपर इंतजार कर रहे अपने साथी ग्रामीणों तक पहुंचाते हैं। यह जानलेवा सिलसिला अब इस गांव की नियति बन चुका है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर इस सुदूर गांव के कई वीडियो तेजी से वायरल हुए हैं, जिसमें महिपाल सिंह को कुएं की खतरनाक गहराइयों में उतरते देखा जा सकता है। इस बारे में बात करते हुए महिपाल सिंह भावुक होकर कहते हैं:

"हमें यह सब बर्दाश्त करना ही होगा। पानी गंदा है, हर वक्त चोट लगने या जान जाने का खतरा बना रहता है, लेकिन हमारे पास और क्या विकल्प है? जो कुछ भी थोड़ा-बहुत पानी बचा है, हम उसी से किसी तरह काम चला रहे हैं।"

ठप पड़ी हैं जल जीवन मिशन की योजनाएं

नवापारा में जल संकट इस कदर गहरा चुका है कि ग्रामीणों की पूरी दिनचर्या सिर्फ पानी के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। भोर होने से बहुत पहले ही कुएं पर बर्तनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, और लोगों को अपनी बारी के लिए देर रात तक इंतजार करना पड़ता है।

  • 24 घंटे का पहरा: ग्रामीण घुरन सिंह ने बताया, "पानी लाना अब हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा और थका देने वाला हिस्सा बन गया है। गांव में कहीं भी पानी नहीं है। कुछ लोग आधी रात तक लाइन में खड़े रहते हैं, तो कुछ लोग सूरज उगने से पहले ही कुएं की तरफ दौड़ पड़ते हैं।"

  • दिखावे के नल: एक अन्य स्थानीय महिला जगमत बाई ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, "पानी यहाँ की सबसे बड़ी समस्या है। 'जल जीवन मिशन' के तहत हर घर में सिर्फ दिखावे के लिए नल और पानी की टंकियां लगा दी गई हैं, लेकिन उनमें पानी की एक बूंद तक नहीं आती। कभी-कभार कोई टैंकर आता है, तो आप ही बताइए, एक टैंकर से पूरे गांव की प्यास कैसे बुझ सकती है?"

ग्रामीणों का आरोप है कि कुएं का जो पानी वे पीने को मजबूर हैं, वह मटमैला और गाद (मिट्टी) से दूषित होता है। इसे पीने से पहले कई बार छानना पड़ता है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। इस संकट का सबसे बुरा असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिनका पढ़ाई और काम का समय पानी जुटाने में बर्बाद हो रहा है।

भूवैज्ञानिक चुनौतियां और प्रशासनिक विफलता

इस पूरे मामले पर लोहारी ग्राम पंचायत के सरपंच मोती सिंह ने अपनी बेबसी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि यह इलाका पहाड़ी और पथरीला है, जिसके कारण यहाँ भूवैज्ञानिक (Geological) चुनौतियाँ बहुत अधिक हैं। इस क्षेत्र में भूजल का स्तर 500 से 600 फीट की अत्यधिक गहराई पर चला गया है, जिसके कारण हाल ही में खोदे गए कई सरकारी और निजी बोरवेल पूरी तरह से विफल (Dry) साबित हुए हैं।

सरपंच ने यह भी स्वीकार किया कि व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं:

"पिछले एक सप्ताह से मैं निजी स्तर पर अस्थायी राहत के लिए गांव में पानी के टैंकरों की व्यवस्था कर रहा हूं। जल जीवन योजना के तहत जो टंकियां बनाई गई हैं, वे घटिया निर्माण के कारण रिस (Leakage) रही हैं। मैंने इस खराबी और जर्जर पाइपलाइनों के बारे में संबंधित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित में सूचित किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।"

कलेक्टर ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश

मामले के सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। एमसीबी जिला कलेक्टर संतान देवी जांगडे ने इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए पत्रकारों को आश्वस्त किया है कि इस लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर ने कहा:

  • ग्राउंड वेरिफिकेशन: अधिकारियों की एक विशेष टीम को तुरंत नवापारा भेजा जा रहा है जो प्राथमिकता के आधार पर जमीनी हकीकत की जांच करेगी।

  • वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक कोई स्थाई समाधान नहीं होता, प्रभावित बस्ती में पानी की गंभीर कमी को दूर करने के लिए तत्काल वैकल्पिक और पर्याप्त जल आपूर्ति (टैंकरों के माध्यम से) सुनिश्चित की जाएगी।

  • लापरवाही पर एक्शन: 'जल जीवन मिशन' के तहत बनी टंकियों में लीकेज और पाइपलाइन की खराबी की जांच के कड़े निर्देश दिए गए हैं। यदि तकनीकी खराबी या निर्माण में कोई भ्रष्टाचार और लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष: नवापारा की यह स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि कागजों पर दौड़ने वाली विकास योजनाएं जब धरातल पर दम तोड़ती हैं, तो आम जनता को अपनी प्यास बुझाने के लिए किस कदर मौत से जूझना पड़ता है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर के आश्वासन के बाद इस सुदूर पहाड़ी गांव को कब तक शुद्ध पेयजल नसीब हो पाता है।

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