कहते हैं कि मां का दिल चाहे इंसान का हो या जानवर का, अपने बच्चे के लिए उसकी ममता और दर्द एक समान होता है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हर किसी की आंखें नम हैं। धरमजयगढ़ वन प्रभाग के छल पहाड़ियों के पास एक बेबस हथिनी रातभर अपने मृत शावक (बच्चे) के शव के पास बैठी रही और अपनी सूंड से उसे झकझोर कर जगाने की कोशिश करती रही।
वन विभाग से मिली ताज़ा जानकारी के अनुसार, देर रात करीब 39 हाथियों का एक विशाल झुंड पुसाल्दा गांव के समीप स्थित एक गहरे तालाब में पानी पीने और नहाने के लिए उतरा था। इसी दौरान झुंड में शामिल एक छोटा नवजात शावक गहरे पानी की चपेट में आ गया। दलदल और गहरे पानी में दम घुटने के कारण मासूम शावक की मौके पर ही मौत हो गई।
जब सुबह ग्रामीणों ने तालाब के पास हाथियों की अजीब और दर्दभरी चिंघाड़ सुनी, तो वे मौके पर पहुंचे। वहां का नज़ारा देखकर ग्रामीणों के रोंगटे खड़े हो गए।
मां की बेबसी देख रो पड़ा पूरा गांव
भावुक कर देने वाला पल: सबसे ज़्यादा विचलित करने वाला दृश्य वह था जब मृत शावक के दुख में पूरे 39 हाथियों का झुंड एक साथ इकट्ठा होकर चिंघाड़ रहा था। हाथियों का यह सामूहिक विलाप इतना दर्दनाक था कि दूर खड़े ग्रामीणों और वनकर्मियों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। ऐसा लग रहा था मानो पूरा जंगल इस शोक में डूबा हुआ हो।
वन विभाग की टीम को करनी पड़ी भारी मशक्कत
कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू: वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मदद से काफी घंटों के प्रयास, ढोल-नगाड़े और पटाखों का नियंत्रित उपयोग करके हाथियों के झुंड और गमगीन मां को शव से थोड़ी दूर खदेड़ा।
शावक का पोस्टमार्टम: वन विभाग के डॉक्टरों की टीम ने मृत शावक के शव को अपने कब्ज़े में लेकर उसका पोस्टमार्टम कराया है, ताकि मौत के सटीक कारणों (जैसे फेफड़ों में पानी भरना या दम घुटना) की आधिकारिक पुष्टि हो सके।
वन अमला अलर्ट पर: एहतियात के तौर पर वन विभाग ने पुसाल्दा और आसपास के ग्रामीणों को अलर्ट जारी किया है, क्योंकि बच्चा खोने के बाद हाथियों का यह झुंड बेहद गुस्से में है और उनके रिहायशी इलाकों की तरफ आने का खतरा बना हुआ है। वन कर्मी लगातार हाथियों की मूवमेंट पर सैटेलाइट और ग्राउंड ट्रैकिंग के जरिए नज़र रख रहे हैं।
यह घटना सोशल मीडिया पर "मदर एलीफेंट लव" और "रायगढ़ एलीफेंट ट्रैजेडी" जैसे हैशटैग के साथ तेजी से वायरल हो रही है, जिसने इंसानों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील होने पर मजबूर कर दिया है।
