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रायपुर भागवत कथा में देवकीनंदन ठाकुर का प्रवचन
रायपुर भागवत कथा में देवकीनंदन ठाकुर का प्रवचन
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रायपुर भागवत कथा : देवकीनंदन ठाकुर का संदेश, तीर्थों की पवित्रता रखना जरूरी

रायपुर के WRS कॉलोनी मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने तीर्थों की गिरती मर्यादा पर चिंता जताई। उन्होंने श्रद्धालुओं से तीर्थ स्थलों को पिकनिक स्पॉट न बनाने और धार्मिक अनुशासन बनाए रखने की अपील की।

कीर्तिमान न्यूज
13 Jul 2026, 03:25 PM
रायपुर
राजधानी के डब्लूआरएस कॉलोनी मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रख्यात कथावाचक ठाकुर देवकीनंदन जी महाराज ने तीर्थों की गिरती मर्यादा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने एक बड़ा संदेश दिया। 
महाराज श्री ने कहा कि आजकल लोग तीर्थ स्थलों को केवल घूमने-फिरने और सैर-सपाटे की जगह समझने लगे हैं, जो कि बेहद चिंताजनक है। तीर्थ वास्तव में मौज-मस्ती के लिए नहीं, बल्कि आस्था, साधना और अपनी आत्मा को शुद्ध करने के पवित्र केंद्र हैं।
उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा: 
"तीर्थों को पिकनिक स्पॉट बनाने की भूल कतई न करें। वहां के अनुशासन, पवित्रता और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना हर एक सनातनी और श्रद्धालु की जिम्मेदारी है। याद रखिए, जब-जब तीर्थों की मर्यादा तार-तार होती है, तब-तब उनकी अलौकिक और दिव्य शक्ति भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।"

गोवर्धन परिक्रमा महोत्सव का आयोजन 

महाराज श्री ने देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे जब भी किसी तीर्थ पर जाएं, तो वहां श्रद्धा, स्वच्छता और उत्तम आचरण का परिचय दें। जब हमारा व्यवहार मर्यादित होगा, तभी हमारे तीर्थों की पहचान और उनका आध्यात्मिक महत्व सुरक्षित रहेगा। कथा के दौरान पंडाल में 'गोवर्धन परिक्रमा महोत्सव' का भव्य आयोजन किया गया। 

देवकीनंदन ठाकुर
बाहरी दिखावा से कोई सरोकार नहीं   

इस दौरान माहौल इतना भक्तिमय हो गया कि पूरा पंडाल गोवर्धन नाथ के जयकारों से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने अपने स्थान पर खड़े होकर मानसिक रूप से गिर्राज महाराज की परिक्रमा की और उनका ध्यान लगाया। इस अलौकिक पल का गवाह बनने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी थी, जिन्होंने अपनी सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।प्रवचन को आगे बढ़ाते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने पूतना मोक्ष के प्रसंग का जीवंत वर्णन किया। उन्होंने समझाया कि भगवान को छप्पन भोग या बाहरी दिखावे से कोई सरोकार नहीं है, वे तो सिर्फ भक्त के मन का सच्चा भाव देखते हैं। 

बच्चों को दे भगवानों का नाम 

जो इंसान अपने अहंकार, छल और स्वार्थ को त्यागकर ठाकुर जी की शरण में आता है, प्रभु उसका कल्याण निश्चित करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक ताने-बाने पर बात करते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा और उनका सम्मान करना हर संतान का पहला और सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने एक व्यावहारिक सीख देते हुए कहा कि अपने बच्चों के नाम भगवान के नाम पर रखें, ताकि बहाने से ही सही, घर में बार-बार प्रभु का नाम गूंजता रहे। 

मंत्री भी पहुंचे कथा रसपान के लिए 

कथा के मुख्य संयोजक योगेश अग्रवाल ने बताया कि रायपुर की इस कथा को लेकर लोगों में अभूतपूर्व उत्साह है। आलम यह है कि पंडाल छोटा पड़ गया है और लोग स्टेडियम की सीढ़ियों पर बैठकर घंटों कथा सुन रहे हैं। इस वीआईपी कथा में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ व्यासपीठ का आशीर्वाद लेने पहुंचे। उनके साथ रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल और कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने भी महाराज श्री से आशीर्वाद लिया और कथा का रसपान किया। 

बिना तिलक प्रवेश नहीं 

कथा स्थल की सबसे खास बात यहाँ की व्यवस्था रही। आयोजन समिति द्वारा लागू किए गए "नो तिलक, नो एंट्री" (बिना तिलक प्रवेश नहीं) के नियम का श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ पालन किया। पंडाल में प्रवेश करने वाले हर एक श्रद्धालु के माथे पर तिलक सुशोभित नजर आ रहा था।
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