रामगढ़ महोत्सव : प्राचीन गुफाओं का मुख्यमंत्री ने किया भ्रमण, पर्यटन को बढ़ावा देने की कही बात
रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीताबेंगरा, जोगीमारा गुफाओं और हाथीपोल का भ्रमण किया। उन्होंने रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
कीर्तिमान डेस्क
01 Jul 2026, 10:34 AM
रामगढ़
सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का समापन मंगलवार को हुआ। समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशालाओं में गिनी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया और इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों और प्रसिद्ध प्राकृतिक संरचना हाथीपोल का भी निरीक्षण किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
संस्कृति, इतिहास और पर्यटन का अनूठा केंद्र है रामगढ़
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह स्थान हजारों वर्षों की कला, साहित्य, आस्था और इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है। विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के लिए भी देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। ऐसी धरोहरों का संरक्षण करना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है।
पर्यटन विकास से स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर लगातार काम कर रही है। उनका कहना था कि इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सीताबेंगरा और जोगीमारा की ऐतिहासिक पहचान
रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय इतिहास, प्राचीन स्थापत्य, शिलालेख और चित्रकला की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों के बीच अपनी प्रसिद्ध कृति 'मेघदूतम्' की रचना की थी। इसी ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व को यादगार बनाए रखने के लिए हर वर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। करीब 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा का प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा के दूसरी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्र और यहां मिले प्राचीन अभिलेख इस स्थल को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान दिलाते हैं।
हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग भी आकर्षण का केंद्र
रामगढ़ की एक और खास पहचान हाथीपोल है। लगभग 180 फीट लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनोखी बनावट के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। माना जाता है कि लंबे समय तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप बना। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं इस पूरे क्षेत्र के ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व को और बढ़ा देती हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन गुफाओं का संबंध रामायण कालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिससे रामगढ़ धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थल बन गया है।