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Nathal Dai Temple Construction Site (Image Source: social media)
Nathal Dai Temple Construction Site (Image Source: social media)
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Nathal Dai Temple: रनपुर में नाथल दाई मंदिर निर्माण की कवायद तेज, मजार और लाउडस्पीकर विवाद से गरमाया माहौल, डीएनए जांच की मांग

Nathal Dai Temple: रनपुर तकिया गांव में नाथल दाई मंदिर निर्माण और कॉरिडोर योजना के बीच मजार, भूमि स्वामित्व और लाउडस्पीकर को लेकर विवाद सामने आया है। मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 16 Oct 2026, 10:30 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
अंबिकापुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Nathal Dai Temple: शहर से सटे रनपुर तकिया गांव में स्थित ऐतिहासिक नाथल दाई स्थल इन दिनों अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। वर्षों से खुले आसमान के नीचे स्थापित नाथल दाई की प्रतिमा के लिए अब भव्य मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि, निर्माण कार्य की शुरुआत के साथ ही यहां मजार, भूमि स्वामित्व और लाउडस्पीकर को लेकर दो समुदायों के बीच प्रशासनिक व कानूनी खींचतान शुरू हो गई है।

₹5 लाख की स्वीकृति और भूमिपूजन, कॉरिडोर बनाने की योजना 

स्थानीय निवासी अनुज दुबे के अनुसार, नाथल दाई मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण के लिए शासन की ओर से ₹5 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके बाद विधिवत भूमिपूजन संपन्न कराया जा चुका है। ग्रामीणों की योजना इस परिसर को 'नाथल दाई कॉरिडोर' के रूप में विकसित करने की है, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

मजार के अस्तित्व पर उठे सवाल, डीएनए (DNA) जांच की मांग 

विवाद की सबसे मुख्य वजह मंदिर परिसर से सटी मजार बनी हुई है, जिसे अंजुमन कमेटी द्वारा संचालित बताया जाता है। इस मामले में हिंदूवादी नेता जन्मेजय मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मजार में दफन व्यक्ति वास्तव में 'पहाड़ी कोरवा' जनजाति का सदस्य था।

नवरात्रि में भजन-कीर्तन पर आपत्ति का आरोप 

स्थानीय लोगों का कहना है कि रनपुर को पारंपरिक रूप से सद्भावना गांव माना जाता रहा है, जहां नाथल दाई के प्रति गहरी आस्था है और मन्नतें पूरी होने की पुरानी परंपरा है। इस बार नवरात्रि के मौके पर यहां पहली बार नौ दिनों के लिए मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई थी। अनुज दुबे का आरोप है कि उत्सव के दौरान दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने बहुत कम आवाज में बज रहे भजनों और लाउडस्पीकर पर आपत्ति जताई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया था। हालांकि, इन आरोपों पर दूसरे पक्ष का कोई औपचारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।

मामला कोर्ट पहुंचा, कानूनी जंग की तैयारी 

मंदिर निर्माण की खबरों के बीच कानूनी पेच भी फंस गया है। हिंदू समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने मंदिर निर्माण को रोकने के लिए अदालत का रुख किया है। दूसरी ओर, मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने साफ किया है कि वे इस मामले में मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

प्रशासनिक रुख पर सबकी नजरें 

रनपुर में नाथल दाई मंदिर निर्माण, कॉरिडोर योजना और मजार से जुड़े ऐतिहासिक दावों ने क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने को संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच, भू-अभिलेखों के सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पर टिका हुआ है। स्थानीय प्रशासन का आधिकारिक रुख सामने आने के बाद ही इस विवाद का पटाक्षेप हो सकेगा।
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