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15 Panchami Meeting Procession with Angadev (Image Source: social media)
15 Panchami Meeting Procession with Angadev (Image Source: social media)
राजनांदगांव

Panchami Bhet: डोंगरगढ़ में ऐतिहासिक पंचमी भेंट, आस्था के साथ दिखा सामाजिक सौहार्द

Panchami Bhet: डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर में ऐतिहासिक पंचमी भेंट इस वर्ष शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। बस्तर से पहुंचे 15 आंगादेव और नई डांग के साथ गोंड समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना की। खैरागढ़ राजपरिवार, मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन के आपसी तालमेल से पुराना विवाद सुलझा और धार्मिक आयोजन में आस्था, परंपरा व सामाजिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 16 Oct 2026, 09:30 AM · 4 मिनट पढ़ने का समय
डोंगरगढ़
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Panchami Bhet: आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का अनोखा संगम इस बार डोंगरगढ़ की पवित्र धरा पर देखने को मिला। मां बम्लेश्वरी मंदिर में आयोजित ऐतिहासिक 'पंचमी भेंट' इस वर्ष पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। बीते वर्षों में गर्भगृह में प्रवेश और पूजा की पद्धतियों को लेकर उपजे विवादों के बाद, इस बार जिला प्रशासन की सूझबूझ और सभी पक्षों के बीच बनी सहमति का असर साफ नजर आया। आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि बस्तर से पहुंचे 15 आंगादेव और मां बम्लेश्वरी के नाम से तैयार की गई नई 'डांग' के साथ गोंड समाज ने अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस दौरान खैरागढ़ राजपरिवार, गोंड समाज और मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के बीच गजब का तालमेल दिखाई दिया।

लाल निवास से हुई यात्रा की शुरुआत 

पंचमी भेंट की यात्रा गुरुवार दोपहर लगभग 3 बजे खैरागढ़ राजपरिवार के डोंगरगढ़ स्थित ऐतिहासिक 'लाल निवास' राजमहल से शुरू हुई। यहां आदिवासी समाज के प्रबुद्धजनों और श्रद्धालुओं ने अपनी पारंपारिक पद्धति से विशेष पूजा-पाठ संपन्न किया। इसके पश्चात, यह यात्रा शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों और देवी-देवताओं के स्थानों से होती हुई आगे बढ़ी, जहां जगह-जगह बस्तर से आए आंगादेव का भव्य स्वागत किया गया। उल्लेखनीय है कि आदिवासी संस्कृति में आंगादेव और डांग का अत्यधिक धार्मिक महत्व है, जो उनकी अटूट आस्था और पूर्वजों की धरोहर का प्रतीक हैं।

बूढ़ादेव गुफा से मंदिर प्रांगण तक उमड़ा जनसैलाब 

पंचमी भेंट यात्रा सर्वप्रथम छीरपानी स्थित पौराणिक बूढ़ादेव गुफा पहुंची। गुफा में विशेष पूजा-अर्चना के बाद यात्रा मेला ग्राउंड के रास्ते होते हुए नीचे स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर के प्रांगण में दाखिल हुई। मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया। गोंड समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि पंचमी भेंट सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह उनकी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।

भविष्य में भी पारंपरिक यात्रा का सहर्ष स्वागत रहेगा-मंदिर ट्रस्ट 

मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने आयोजन की सफलता पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा, "पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे आदिवासी भाइयों की इस यात्रा का डोंगरगढ़वासियों और श्रद्धालुओं ने बहुत उत्साह के साथ स्वागत किया। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने इस पर्व की गरिमा और रौनक को कई गुना बढ़ा दिया।" उन्होंने आगे भी इस तरह के पारंपरिक आयोजनों का स्वागत करने की बात कही।

पारंपारिक पद्धति से पूजा-पाठ संपन्न 
आपसी तालमेल से निकला विवाद का हल-भवानी बहादुर सिंह 

खैरागढ़ राजपरिवार के राजकुमार भवानी बहादुर सिंह ने आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए गोंड समाज, मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार हमेशा से सभी समाजों को साथ लेकर चलने की परंपरा में विश्वास रखता है। अतीत के मतभेदों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल आपसी बातचीत और सहयोग से ही संभव है। उन्होंने संतोष पडोती, ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल और समस्त सदस्यों के प्रति आभार प्रकट करते हुए संपूर्ण छत्तीसगढ़ में इसी प्रकार आपसी भाईचारे और शांति की कामना की।

प्रशासन और पुलिस की सतर्कता रंग लाई 

इस बार आयोजन को निर्विघ्न और शांतिपूर्ण बनाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने पहले ही रूपरेखा तैयार कर ली थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने राजपरिवार, गोंड समाज और मंदिर ट्रस्ट के साथ कई दौर की बैठकें कीं, जिससे सभी बिंदुओं पर सहमति बन सकी। कार्यक्रम के दौरान भी सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कड़े इंतजाम रहे, जिसकी वजह से इस बार पंचमी भेंट बिना किसी गतिरोध के श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई।
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