विकासखंड आरंग के ग्राम कुरुद(कुटेला) स्थित शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। एक ओर प्राथमिक शाला में भवन की कमी के कारण 75 से अधिक बच्चों को एक ही छोटे से हाल में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, वहीं माध्यमिक शाला में 60 प्रतिशत से अधिक छात्राएं होने के बावजूद एक भी महिला शिक्षिका पदस्थ नहीं है।
दूसरी ओर शौचालय मरम्मत पर सरकारी राशि खर्च होने के बाद भी अधूरा कार्य जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।प्राथमिक शाला में कक्षा पहली से पांचवीं तक के करीब 70 से 75 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय परिसर में दो अतिरिक्त हाल और एक बरामदा मौजूद है, लेकिन भवन जर्जर होने तथा छत से लगातार पानी टपकने के कारण उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सभी बच्चों को लगभग 20×12 फीट के एक ही हाल में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है।

बरसात में बढ़ जाता है खतरा
एक ही कक्ष में अलग-अलग कक्षाओं का संचालन होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षकों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। जर्जर भवन में सांप और बिच्छुओं के प्रवेश की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर हमेशा खतरा बना रहता है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार नए भवन की मांग ग्राम पंचायत तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के माध्यम से कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। ग्रामीणों और पालकों ने जिला प्रशासन से नए विद्यालय भवन की स्वीकृति देकर शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। कुरुद के माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 6वीं से 8वीं तक लगभग 180 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें करीब 60 प्रतिशत बालिकाएं हैं। इसके बावजूद विद्यालय में एक भी महिला शिक्षिका पदस्थ नहीं है।
महिला शिक्षिका की पदस्थापना की मांग
बालिकाओं को अपनी व्यक्तिगत समस्याएं पुरुष शिक्षकों के सामने रखने में संकोच होता है। इसे देखते हुए विद्यालय प्रबंधन ने यहां तत्काल एक महिला शिक्षिका की पदस्थापना की मांग की है। विद्यालय में शौचालय मरम्मत कार्य भी विवादों में है। सूचना फलक के अनुसार शिक्षा मद से 30 हजार 919 रुपए की राशि स्वीकृत कर मरम्मत कार्य कराया गया, लेकिन कार्य आज भी अधूरा नजर आ रहा है। शौचालय की छत पर शीट नहीं लगाई गई है, जिससे बारिश का पानी सीधे अंदर आता है।
दीवारों और छत पर दरारें भी साफ दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद यदि छात्र-छात्राओं को उपयोगी और सुरक्षित शौचालय नहीं मिल पा रहा है, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता और राशि के उपयोग की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से किया तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह
कुरुद के विद्यालय की यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। भवन, शिक्षकों और मूलभूत सुविधाओं की कमी के बीच नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यालय की सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।