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कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुंचे सदस्य
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुंचे सदस्य
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बैठकें नहीं, विकास भी ठप : अध्यक्ष समेत 15 सदस्यों ने सीईओ के खिलाफ खोला मोर्चा

जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 15 निर्वाचित सदस्यों ने सीईओ हेमंत नंदनवार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर कलेक्टर को सात सूत्रीय शिकायत सौंपी है। जनप्रतिनिधियों ने बैठकों में देरी, योजनाओं की जानकारी नहीं देने और विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने सहित कई गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Jul 2026, 07:47 AM · अपडेट: 30 Oct 2026, 03:26 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
जिला पंचायत में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत 15 निर्वाचित सदस्यों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर मोर्चा खोल दिया है।
जनप्रतिनिधियों ने शुक्रवार को कलेक्टर को ७ बिंदुओं पर आधारित शिकायत सौंपते हुए सीईओ पर पंचायती राज व्यवस्था की भावना के विपरीत कार्य करने, जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा करने और विकास कार्यों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। 

नहीं होती छह महीने तक बैठक 

जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल ने कहा कि सीईओ का व्यवहार जनप्रतिनिधियों के प्रति सहयोगात्मक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायती राज अधिनियम और नियमों के विपरीत सामान्य सभा की बैठकें समय पर आयोजित नहीं की जा रही हैं। कई बार छह-छह महीने तक बैठक नहीं होने से विकास कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव लंबित पड़े हैं और विभिन्न योजनाओं के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का भी हनन हो रहा है। 

आबंटित राशि की जानकारी उपलब्ध नहीं 

शिकायत में कहा गया है कि जिला पंचायत के सदस्यों को शासकीय योजनाओं, स्वीकृत विकास कार्यों, उपलब्ध बजट और विभिन्न मदों में आवंटित राशि की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी नहीं कर पा रहे हैं और आम जनता के सवालों का जवाब देने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।  

लंबित रखा जा रहा भुगतान 

जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए कार्यों के अंतिम भुगतान में भी अनावश्यक देरी की जा रही है। कई ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य पूर्ण होने के बावजूद अंतिम भुगतान जांच और अतिरिक्त औपचारिकताओं के नाम पर लंबे समय से लंबित रखा गया है। इसका सीधा असर निर्माण एजेंसियों, पंचायतों और स्थानीय हितग्राहियों पर पड़ रहा है तथा विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।
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