छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शराब के कारोबार से 10,715 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो राज्य के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजस्व स्रोत साबित हुआ है। आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यह राशि राज्य के खजाने को मजबूत करने और विकास परियोजनाओं में निवेश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि शराब की बिक्री से हुई आय ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास सहित कई योजनाओं के लिए वित्तीय आधार को मज़बूत किया है। यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य सरकार ने आबकारी नीति को एक सशक्त राजस्व साधन के रूप में विकसित किया है।
राजस्व में 10% बढ़ोतरी का लक्ष्य
आबकारी विभाग ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रणनीति पहले ही तैयार कर ली है। इस बार राज्य सरकार को उम्मीद है कि शराब की बिक्री से 10 प्रतिशत तक राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए शहरों और कस्बों में शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने, बार और क्लबों का लाइसेंस देने और शराब की आपूर्ति को व्यवस्थित करने के कई कदम उठाए जा रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह वृद्धि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध करवा सकती है।
सामाजिक चिंताएँ
संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण
विश्लेषकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार के सामने मुख्य चुनौती है कि वह शराब से राजस्व बढ़ाए, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारी और युवा कल्याण को नजरअंदाज न करे। राज्य की आबकारी नीतियों को इस तरह से सुधारने की जरूरत है कि शराब कारोबार से प्राप्त राजस्व का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा विकास कार्यक्रमों में लगाया जाए। साथ ही शराब की दुकानों और क्लबों के विस्तार को नियंत्रित करना और आबकारी नियमों का कड़ाई से पालन कराना भी जरूरी है।
