क्या था पूरा मामला?
तकनीकी जांच ने सुलझाई अनसुलझी गुत्थी
कड़ियों से कड़ी मिलती गई, यूं पहुंचा मास्टरमाइंड तक
मोबाइल की खरीद-बिक्री की इस लंबी चेन को खंगालते हुए जूटमिल पुलिस ने एक-एक कर सभी कड़ियों को जोड़ना शुरू किया:
पुलिस ने सबसे पहले भुवन निषाद को हिरासत में लिया, जिसने बताया कि उसने यह मोबाइल रोहित दुलेवाले (30) से खरीदा था।
जब रोहित से पूछताछ हुई, तो उसने बाजीराव पारा निवासी संजय कुमार सिंह (18) का नाम लिया।
संजय से पूछताछ करने पर उसने बताया कि उसने यह फोन कबीर चौक निवासी आकाश डेविड (20) से लिया था।
आखिरकार, जब आकाश से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने कबूला कि उसने यह मोबाइल एफसीआई गोदाम के पास रहने वाले शनि केंवट (19) से खरीदा था।
इस तरह छोटी-छोटी कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार मुख्य आरोपी शनि केंवट तक पहुंच गई। पूछताछ में शनि ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर इस लूट की वारदात को अंजाम देने की बात कबूल कर ली।
महज 3 हजार में बिका था फोन, खरीदार भी फंसे
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी शनि ने लूटे गए पोको कंपनी के मोबाइल को आकाश डेविड के पास मात्र 3 हजार रुपए में बेच दिया था। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित चालक दीपक कुमार से कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मुख्य आरोपी शनि की शिनाख्त कराई और फोन को जब्त कर लिया। वहीं, बीच में शामिल आरोपी भुवन निषाद ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने लूटा हुआ फोन बेचने से मिले पैसों से अपना खुद का सैमसंग A36 मोबाइल खरीद लिया था। पुलिस ने गवाहों के सामने इस नए मोबाइल को भी जब्त कर लिया है।इन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई
जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि नीरज परियानी, भुवन निषाद, रोहित दुलेवाले, संजय कुमार सिंह और आकाश डेविड—इन सभी को अच्छी तरह पता था कि यह मोबाइल चोरी या लूट का है, इसके बावजूद इन्होंने चंद पैसों के लालच में इसे खरीदा। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) भी जोड़ दी। पुलिस ने मुख्य आरोपी शनि केंवट समेत सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर जेल भेज दिया है।
चोरी का सामान खरीदना भी अपराध
रायगढ़ के एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इस पूरे मामले पर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि चोरी या लूट का सामान खरीदने वाले लोग किसी भी कीमत पर कानून की गिरफ्त से बच नहीं सकते। चंद रुपयों या सस्ते सामान के लालच में अपराधियों का साथ देना और उनका सामान खरीदना भारी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वालों को भी सीधा जेल की हवा खानी पड़ सकती है।







