भारतीय संगीत जगत में अपनी अनोखी आवाज और अलग अंदाज के लिए मशहूर गायिका ऊषा उत्थुप ने दशकों तक अपने गीतों से श्रोताओं का मनोरंजन किया। उनकी दमदार और गहरी आवाज ने उन्हें संगीत की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई, लेकिन लंबे समय तक उन्हें वह सम्मान और पुरस्कार नहीं मिल सके, जिसकी वे वास्तव में हकदार थीं। 40 वर्षों के लंबे करियर के बाद एक ऐसा गाना आया जिसने उनकी किस्मत बदल दी और उन्हें रातों-रात पुरस्कारों और सराहनाओं का केंद्र बना दिया।
अलग आवाज ने दिलाई अलग पहचान
ऊषा उत्थुप उन चुनिंदा गायिकाओं में शामिल हैं जिन्होंने पारंपरिक गायन शैली से हटकर अपनी अलग पहचान बनाई। रंग-बिरंगी साड़ियों, बड़े बिंदी और विशिष्ट मंचीय प्रस्तुति के साथ उनकी आवाज भी हमेशा भीड़ से अलग दिखाई दी। उन्होंने हिंदी के अलावा कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में गीत गाए और संगीत प्रेमियों के बीच खास लोकप्रियता हासिल की इसके बावजूद, मुख्यधारा के फिल्म संगीत में उन्हें अक्सर वह स्थान नहीं मिला जो अन्य लोकप्रिय गायिकाओं को मिला करता था। कई सुपरहिट गीत देने के बाद भी पुरस्कारों की सूची में उनका नाम कम ही दिखाई देता था।
जब आया ‘7 खून माफ’ का प्रस्ताव
साल 2011 में निर्देशक विशाल भारद्वाज की फिल्म 7 खून माफ के लिए ऊषा उत्थुप को ऑफर मिला। फिल्म में प्रियंका चोपड़ा मुख्य भूमिका में थीं और ऊषा उत्थुप ने भी एक महत्वपूर्ण किरदार ‘मैगी’ निभाया था। यह फिल्म प्रियंका चोपड़ा के किरदार सुजाना अन्ना-मैरी जोहांस की कहानी पर आधारित थी, जिसमें उसके जीवन में आए सात पतियों की कहानी दिखाई गई थी। फिल्म का संगीत भी काफी अलग और प्रयोगधर्मी था।
डार्लिंग सोंग ने बदल दी जिंदगी
फिल्म का गीत डार्लिंग रिलीज होते ही चर्चा में आ गया। ऊषा उत्थुप की दमदार आवाज में रिकॉर्ड किए गए इस गाने ने दर्शकों और संगीत समीक्षकों दोनों को प्रभावित किया। गीत का अनोखा अंदाज, बोल और ऊषा की विशिष्ट गायकी इसे अन्य गीतों से अलग बनाती थी। यह गाना फिल्म में प्रियंका चोपड़ा के पहले पति की कहानी से जुड़ा हुआ था और कहानी के माहौल को बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता था। दर्शकों ने इस गीत को हाथोंहाथ लिया और यह जल्द ही एक कल्ट क्लासिक के रूप में पहचान बनाने लगा।
पहली बार मिला बड़ा अवॉर्ड
‘डार्लिंग’ की सफलता का सबसे बड़ा असर ऊषा उत्थुप के करियर पर पड़ा। चार दशक से अधिक समय तक संगीत जगत में सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें पहली बार इस गीत के लिए बड़े स्तर पर पुरस्कार और सम्मान मिलने लगे। इस गाने के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का प्रतिष्ठित सम्मान मिला। यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि इतने लंबे करियर के बाद उन्हें पहली बार किसी बड़े अवॉर्ड समारोह में उनके योगदान के अनुरूप पहचान मिली।
आज भी पसंद किया जाता है यह गीत
रिलीज के वर्षों बाद भी ‘डार्लिंग’ संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। सोशल मीडिया और म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर यह गीत आज भी खूब सुना जाता है। कई युवा कलाकार भी इस गीत को मंचों पर प्रस्तुत करते नजर आते हैं। ऊषा उत्थुप का यह सफर इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा को पहचान मिलने में भले समय लग जाए, लेकिन सच्ची कला अंततः अपना मुकाम हासिल कर ही लेती है। ‘डार्लिंग’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि उस कलाकार की सफलता की कहानी है जिसने अपने अलग अंदाज से भारतीय संगीत में अमिट छाप छोड़ी।
